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मनरेगा में भ्रष्टाचार का नंगा नाच: मुरैना में गरीबों के हक पर डाका, कागजों पर दौड़ रहे मृत और फर्जी मजदूर!
मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) गरीबों के जीवन को संवारने के बजाय भ्रष्ट अधिकारियों और कागजी सूरमाओं की तिजोरी भरने का जरिया बन गया है। जिले में आए दिन सामने आने वाले मनरेगा घोटाले यह चीख-चीख कर कह रहे हैं कि यहां भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हो चुकी हैं। हालात यह हैं कि धरातल पर एक फावड़ा तक नहीं चलता, लेकिन कागजों पर जेसीबी मशीनों से होने वाले कामों का भुगतान धड़ल्ले से जारी कर दिया जाता है। जिन लोगों की मौत सालों पहले हो चुकी है, वे भी इस सिस्टम में आज तक सक्रिय मजदूर बनकर बाकायदा मजदूरी उठा रहे हैं। इसके अलावा, उन संपन्न और रसूखदार लोगों के नाम पर भी फर्जी मस्टर रोल भरे जा रहे हैं, जिन्होंने कभी गांव की मिट्टी में हाथ तक नहीं डाले। श्रमदान के नाम पर आने वाली इस सरकारी रकम को जनप्रतिनिधियों, पंचायत सचिवों और तकनीकी अमले की मिलीभगत से खुलेआम लूटा जा रहा है। मजदूर हताश होकर दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं, जबकि घपलेबाज महलों में बैठकर गरीबों के खून-पसीने की कमाई डकार रहे हैं। जिला प्रशासन की लीपापोती वाली जांचें इस अवैध खेल पर पर्दा डालने का काम कर रही हैं। जब तक इन सफेदपोश भ्रष्टाचारियों पर सख्त बुलडोजर कार्रवाई नहीं होती, तब तक मुरैना में मनरेगा का दम ऐसे ही घुटता रहेगा।


