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मध्यप्रदेश

चालकों की हड़ताल दूसरे दिन भी जारी, जनजीवन अस्त-व्यस्त, दूध-सब्जी के लिए परेशान हुए लोग

भोपाल। हिट एंड रन कानून के विरोध में चालकों की हड़ताल दूसरे दिन भी जारी है। इसके चलते यात्री बसों और ट्रकों के पहिए थमे हुए हैं। उधर, मंगलवार से स्कूल बस व वैन के चालक भी हड़ताल में शामिल गए। इससे सुबह-सुबह अभिभावकों को अपने बच्चों को स्कूल भेजने के लिए परेशान होना पड़ा। ड्राइवरों की हड़ताल के चलते कई स्कूलों में छुट्टी भी घोषित कर दी गई है।

उधर, चालकों की हड़ताल से पेट्रोल-डीजल समेत आम जरूरतों की चीजों की सप्लाई भी प्रभावित हुई है। सोमवार की तरह मंगलवार को भी सुबह से ही पेट्रोल पंपों पर वाहनों की लंबी कतार लगी है। उधर, सोमवार रात को पेट्रोल-डीजल की पर्याप्त आपूर्ति के प्रशासन के दावे के बाद भी कई पेट्रोल पंप मंगलवार सुबह से ही सूखे नजर आए। इसके चलते अपने वाहनों में पेट्रोल-डीजल भरवाने के लिए पहुंचे लोगों को मायूस होकर लौटना पड़ा। हड़ताल कर रहे चालकों के अनुसार तीन दिनों तक यह हड़ताल रहेगी। ऐसे में गांवों और दूसरे शहरों से आने वाले सामान की आपूर्ति भी प्रभावित होने लगी है। कई जगहों पर दूध और किराना सामान भी नहीं पहुंच पा रहा है।

उधर, नगर सेवा की भी बसें नहीं चलने के कारण बड़ी संख्या में लोग सुबह अपने दोपहिया वाहनों से कार्यस्थलों की ओर निकले। राजधानी से सटी औद्योगिक नगरी मंडीदीप की ओर जाने वाले मार्ग पर आम दिनों के मुकाबले कई गुना ज्यादा दोपहिया वाहन नजर आए।

 

हड़ताल के चलते मार्केट में सब्जी सहित अन्य खाद्य सामग्रियों की किल्लत हो गई, जिससे इनके दाम भी बढ़ गए। हालांकि जिला प्रशासन, नगर निगम, दुग्ध् संघ सहित अन्य विभागों के अधिकारी व्यवस्थाओं को नियंत्रण में करने का दावा कर रहे हैं।

व्यापारियों के अनुसार मंगलवार को ट्रक नहीं पहुंचे, लेकिन किसान जिनके पास खुद के वाहन हैं वही मंडी आए हैं। इसके चलते 70 प्रतिशत से अधिक सब्जी की आवक पर फर्क पड़ा है। वहीं सांची दूध के ड्राइवरों ने आने के लिए भी मना कर दिया है। जिसको लेकर दुग्ध महासंघ ने अलग से ड्राइवरों की व्यवस्था की है। बताया जा रहा है कि भोपाल में दूध की 30 प्रतिशत आपूर्ति प्रभावित हुई है। सांची और अमूल दूध की आपूर्ति जारी है। दुग्ध संघ ने नगरीय वाहनों के जरिए दूध इकट्ठा कर फैक्ट्री तक लाया गया है। कुछ क्षेत्रों में दूध नहीं पहुंचने से लोगों को परेशान होना पड़ रहा है।

राजधानी में लगभग 500 सांची दूध पार्लर है और हर दिन करीब ढाई लाख लीटर की खपत होती है। वहीं, अमूल दूध की खपत 70 हजार लीटर प्रतिदिन है। खुले दूध की खपत प्रतिदिन लगभग आठ लाख लीटर तक है। कलेक्टर आशीष सिंह ने बताया कि दुग्ध संघ से आपूर्ति प्रभावित न हो, इसके लिए नगर निगम के ड्राइवरों को जिम्मा सौंपा गया है।

करोंद मंडी में बाहर से आने वाले सब्जियों और फलों के वाहन नहीं पहुंचे हैं, इस वजह से दामों पर असर पड़ सकता है। वहीं भोपाल के थोक बाजारों से आसपास के 200 किमी के दायरे में किराना सामान की आपूर्ति होती है। हड़ताल के पहले दिन 50 प्रतिशत आपूर्ति पर असर पड़ा था। भोपाल व्यापारी महासंघ के महासचिव अनुपम अग्रवाल ने बताया कि सोमवार को मालवाहक लोडिंग वाहन एवं ट्रक नहीं चले हैं। यह मंगलवार को भी नहीं अए हैं हालांकि हमारे पास अभी स्टाक है, अगर सप्ताह भर से अधिक हड़ताल चलती है तो किराने के सामान की दिक्कत हो सकती है। वहीं लोडिंग आटो चालकों का कहना है कि ऊपर से कोई निर्णय आने के बाद ही वह गाड़ी निकालेंगे। हालांकि कुछ चालक गाड़ी चला रहे हैं। बता दें भोपाल में इंदौर, डबरा, पिपरिया से दालें, महाराष्ट्र से शक्कर, उत्तर प्रदेश, गुजरात और दिल्ली से चावल आता है। वहीं, आटे की आपूर्ति लोकल मिल से होती है।

सर्वधर्म आटो चालक संघ अध्यक्ष आदिल खान ने बताया कि मंगलवार को भी आटो बंद रहेंगे। प्रशासन की तरफ से हमें समझाइश आई थी। हालांकि, बुजुर्ग, कमजोर और बीमार लोगों के साथ नरमी बरती जाएगी। भोपाल में तीन हजार से ज्यादा आटो चलते हैं। वहीं टैक्सी यूनियन के जिलाध्यक्ष नफीस उद्दीन ने बताया कि अधिकतर कैब ड्राइवर तीन जनवरी तक हड़ताल पर रहेंगे। भोपाल में दो हजार से अधिक कैब चलती हैं। करीब एक हजार कैब ड्राइवर हड़ताल पर हैं।

इसी के साथ पेट्रोल पंपों की स्थिति में सुधार के आसार हैं। भोपाल पेट्रोल डीजल एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय सिंह ने बताया कि पेट्रोल की किल्लत को लेकर ड्राइवरों से बात हुई है। अधिकतर ड्राइवरों ने पेट्रोल पहुंचाने की बात पर सहमति जताई है।

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