ब्रेकिंग
मुरैना में 'जहर' पर मेहरबानी: क्या मिलावटखोरों के 'कवच' बन गए हैं अधिकारी गुप्ता? मुरैना पुलिस की 'सेलेक्टिव होली': सच दिखाने वालों से दूरी, वाह-वाही करने वालों पर 'रंग' की बौछार! यूजीसी और आरक्षण को लेकर अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की दो दिवसीय राष्ट्रीय बैठक इंदौर में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी घोषित मंडला पुलिस की त्वरित कार्रवाई डकैती के पांच आरोपी जबलपुर से गिरफ्तार, रकम एवं उपयोग की गई कार बरामद भिंड के गोहद चौराहा थाना क्षेत्र के बिरखडी गांव के पास तेज़ रफ़्तार ट्रक ने ट्रेक्टर ट्रॉली में मारी... असम में राजधानी एक्सप्रेस से टकराकर 7 हाथियों की मौतः एक घायल; ट्रेन के 5 डिब्बे-इंजन पटरी से उतरे भिंड में रेत माफियाओं पर कार्रवाई के समय रेत माफियाओं ने एसडीएम की गाड़ी को मारी टक्कर बाल-बाल बचे। अधिकारियों की प्रताड़ना से तंग आकर पोस्ट मेन ने फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला की समाप्त ग्वालियर पुलिस लाइन के क्वार्टर में प्रधान आरक्षक ने की आत्महत्या, मचा हड़कंप
मध्यप्रदेश

बेलसरा छात्रावास की छात्राएं अचेत, घर ले गए अभिभावक

उमरिया। जिले के करकेली विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत बेलसरा में अचानक से छात्राएं अचेत होने लगी और बेहोश होने लगी। बेहोश होने वाली छात्राओं की संख्या 12 से ज्यादा थी। किसी ने कहा उन पर भूत का साया है तो कोई कहने लगा छात्रावास में जादू-टोना होता है। छात्राओं की बेहोशी की खबर फैली तो कलेक्टर ने डॉक्टरों की टीम को रवाना कर दिया। तहसीलदार भी मौके पर पहुंचे लेकिन देर शाम तक कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई। हालांकि बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए कई अभिभाव अपनी बच्चियों को अपने साथ वापस घर ले गए हैं।

भयभीत वार्डन ने छात्राओं को अकेला छोड़

इस घटनाक्रम की सबसे अहम जानकारी यह है कि छात्रावास की वार्डन केतकी देवी घटना के बाद छात्राओं को छोड़कर अपने घर चली गईं। उनसे जब फोन पर संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि वे खुद बेहोश हो गईं थी और यही कारण है कि वे छात्रावास से अपने घर चली गईं। उन्होंने कहा कि उन्हें भी छात्रावास में भय लग रहा था। छात्राओं की जिस पर जिम्मेदारी थी जब वे खुद ही वहां से चली गई तो छात्राओं का क्या हुआ होगा इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।

तेरह साल से संचालित हॉस्टल

ग्राम पंचायत बेलसरा स्थित नेताजी सुभाष चंद्र बोस बालिका छात्रावास पिछले 13 साल से संचालित है और किसी न किसी कारण से कई बार यह हास्टल चर्चाओं में आ चुका है। बताया गया कि 2009-10 में या छात्रावास बनकर तैयार हुआ है और 2011 से संचालित हो रहा है। सौ सीटर इस छात्रावास में घटना के समय कुल 85 छात्राएं थी जिसमें से 40 को उनके अभिभावक अपने साथ ले जा चुके थे। शेष छात्राएं अभी भी छात्रावास में थी जिनका अनुभव काफी बुरा था। वे काफी डरी हुई थीं और कुछ भी स्पष्ट रूप से बता नहीं पा रहीं थीं।

रात के समय हास्टल में कुछ ऐसा होता है जो नहीं होना चाहिए

गांव के लोगों का कहना है कि रात के समय हास्टल में कुछ ऐसा होता है जो नहीं होना चाहिए। हास्टल के अंदर रात में तंत्र साधना की जाती है जिसके लिए कुछ बाहरी लोगों को प्रवेश दिया जाता है। यही कारण है कि छात्राएं भयभीत रहती हैं और किसी से कुछ कह नहीं पाती। स्थानीय लोगों कहना है की मरघट के ऊपर यह छात्रावास बना है जिसके वजह से कई समस्या उत्पन्न हो रही हैं। वहीं कुछ छात्राओं का यह भी कहना है कि जब से हमने अधीक्षक की शिकायत की है तब से हमें बेहद परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

घटिया भोजन की शिकायत

हॉस्टल में घटिया भोजन परोसने की शिकायत पिछले साल सामने आई थी। हाल ही में यह जानकारी सामने आई थी कि यहां बच्चों को समय से भोजन नहीं मिलता। जो भोजन परोसा जाता है वह सड़ा-गला और घटिया भोजन होता है जिसमें कीड़े मिलना आम बात है। तरह-तरह की समस्याओं से कक्षा छह से आठवीं तक की बालिकाएं काफी परेशान थी और उन्होंने कई बार अपनी इन समस्याओं से अधिकारियों को अवगत कराने का प्रयास किया था।

हमारी जानकारी में छात्राओं के बेहोश होने की घटना आई है। हमने जांच के लिए डॉक्टरों की टीम और तहसीलदार को रवाना किया है। जैसे ही जांच हो जाती है इस घटनाक्रम के बारे में बताया जाएगा।

बुद्धेश वैद्य, कलेक्टर उमरिया।

Related Articles

Back to top button