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मध्यप्रदेश

अधिकारी बन ठगी करना बना ट्रेंड कुलपति के नाम से हुआ प्रयास

ग्वालियर। आनलाइन ठगी करने वालों ने अब पैटर्न बदल लिया है। शहर के बड़े-बड़े अधिकारियों के नाम से यह लोग ठगी करते हैं। टेक्नोलोजी का भरपूर उपयोग करते हुए यह अब तक फेसबुक पर फर्जी अकाउंट बनाकर ठगी करते थे, लेकिन अब यह ठग वाट्सएप पर भी अपनी जड़ें पसार रहे हैं। हाल ही में जीवाजी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अविनाश तिवारी की पहचान ओढ़कर ठग ने वाट्सएप अकाउंट बनाया है और उसके बाद जेयू के ही अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों को मैसेज कर ठगने का प्रयास किया है। हालांकि इस घटना की सूचना मिलते ही कुलपति तिवारी ने आफिशियल अकाउंट पर मैसेज करके सभी को इस फर्जी अकाउंट के बारे में सूचना दे दी थी, जिससे लोग इस ठग के शिकार बनने से बच गए।

बता दें हाल ही में फेसबुक की मदद से एक ठग ने ग्वालियर के पूर्व एसपी अमित सांघी का भी फर्जी अकाउंट बनाकर लोगों को ठगने का प्रयास किया था। जिस अधिकारी का अकाउंट बनाया है उसके कद, पद को ध्यान में रखकर ठग सामने वाले से बात करता है। महाराष्ट्र का था नंबर: जीवाजी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. तिवारी ने जेयू के जनसंपर्क अधिकारी डा. विमलेंद्र सिंह राठौर को भी मैसेज किया। विमलेंद्र ने जब नईदुनिया से उस अकाउंट की जानकारी को साझा किया तो उसकी डिटेल निकालने पर वह नंबर महाराष्ट्र का निकला। ठग ने दिमाग लड़ाते हुए उस नंबर को ट्रू कालर पर भी रजिस्टर किया था। किसी को शक न हो इसके लिए नंबर को वीसी सर के नाम से सेव किया गया था। मैसेज कर बताया अकाउंट फर्जी है : कुलपति प्रो. तिवारी ने इस मामले की जानकारी मिलते ही सबसे पहले लोगों को सचेत किया। उन्होंने जीवाजी विश्वविद्यालय के आफिशियल अकाउंट पर मैसेज कर सभी को सूचित किया कि उक्त अकाउंट, जिससे सभी को मैसेज किया जा रहा है वह अकाउंट फर्जी तरीके से बनाया हुआ है, उनका उससे कोई लेना-देना नहीं है। यदि किसी को उस नंबर से मैसेज आता है तो कोई जवाब न दें।

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