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मध्यप्रदेश

भ्रष्टाचार मामले में तत्कालीन नेपानगर नपा सीएमओ के ड्राइवर को सजा, सीएमओ पर कार्रवाई लंबित

बुरहानपुर। जिले के बहुचर्चित रिश्वत कांड मामले में शनिवार को प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश तपेश कुमार दुबे की अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। न्यायाधीश ने नगर पालिका नेपानगर के तत्कालीन सीएमओ सुधाकर कुबड़े के ड्राइवर अनिल गावंडे को चार साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही दो हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।

लोकायुक्त पुलिस ने गावंडे को सीएमओ की ओर से 12 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। सीएमओ कुबड़े के खिलाफ लोकायुक्त की ओर से अब तक अभियोग पत्र प्रस्तुत नहीं किए जाने के कारण कार्रवाई लंबित रखी गई है। जिले के इतिहास में संभवत: यह पहला मामला है जब भ्रष्टाचार के मामले में किसी आरोपित को सजा सुनाई गई है। लोक अभियोजन अधिकारी कैलाशनाथ गौतम ने बताया कि आरोपित को यह सजा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7, 13(1)डी , 13(2) के अंतर्गत सुनाई गई है। लोकायुक्त की यह ट्रैप कार्रवाई नवंबर 2014 में हुई थी। करीब नौ साल बाद फैसला आया है।

सप्लायर से मांगा था 32 प्रतिशत कमीशन

जिला लोक अभियोजन अधिकारी कैलाशनाथ गौतम ने बताया कि 13 नवंबर 2014 को नगर पालिका नेपानगर के सप्लायर अजय ओसवाल निवासी बड़वाह जिला खरगोन ने लोकायुक्त पुलिस इंदौर को लिखित शिकायत की थी। इसमें बताया था कि वह नगर पालिकाओं में सामग्री सप्लाई का कार्य करता है। उसने नेपानगर में लगभग 1.80 लाख रुपये की स्वच्छता सामग्री, जल संधारण और विद्युत सामग्री सप्लाई की थी। वैट टैक्स व टीडीएस काटकर लगभग 1,75000 रुपये का भुगतान करने के बदले सीएमओ कुबड़े 32 प्रतिशत यानी 56 हजार रुपये रिश्वत की मांग कर रहे हैं।

सीएमओ ने ड्राइवर को दिलाई रिश्वत की राशि

लोकायुक्त पुलिस ने इसकी रिकार्डिंग कर ट्रैप करने के लिए जाल बिछाया। अजय ओसवाल जब रिश्वत की पहली किस्त के 12 हजार रुपये देने पहुंचा तो सीएमओ कुबड़े ने अपने ड्राइवर दैवेभो कर्मचारी अनिल गावंडे को राशि देने के लिए कहा। गावंडे ने जैसे ही राशि ली, लोकायुक्त पुलिस ने उसे गिरफ्तार किर लिया था। लोकायुक्त निरीक्षक अनिल सिंह चौहान द्वारा विवेचना की गई थी।

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