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मध्यप्रदेश

रीवा, जबलपुर, शहडोल में वर्षा के आसार, भोपाल में गिर सकती हैं छिटपुट बौछारें

भोपाल। उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उससे लगे ओडिशा के तट पर कम दबाव का क्षेत्र बन गया है। मानसून द्रोणिका अभी भी मध्य प्रदेश के रतलाम, सीधी से होकर जा रही है। मौसम विज्ञानियों के मुताबिक इन मौसम प्रणालियों के असर से पूर्वी मध्य प्रदेश में बुधवार से एक बार फिर वर्षा का सिलसिला शुरू होने के आसार हैं। इसके तहत शहडोल, जबलपुर, रीवा संभाग के जिलों में कहीं-कहीं मध्यम स्तर की वर्षा हो सकती है। राजधानी भोपाल में भी दोपहर के बाद छिटपुट बौछारें पड़ने की संभावना है। उधर पिछले 24 घंटों के दौरान बुधवार सुबह साढ़े आठ बजे तक खंडवा में 41 मिलीमीटर वर्षा हुई। जबलपुर एवं खजुराहो में बूंदाबांदी हुई।

यहां वेदर सिस्टम सक्रिय

मौसम विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ मौसम विज्ञानी अशफाक हुसैन ने बताया कि उत्तर-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी एवं उससे लगे ओडिशा के तट पर कम दबाव का क्षेत्र बन गया है। मानसून द्रोणिका जैसलमेर, कोटा, रतलाम, सीधी, रांची से होते हुए बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र तक जा रही है। इसके अतिरिक्त दक्षिण-पश्चिमी राजस्थान पर हवा के ऊपरी भाग में बना चक्रवात अब कच्छ की तरफ चला गया है।

पूर्वी मप्र में बढ़ेंगी मानसून गतिविधियां

मौसम विज्ञान केंद्र के पूर्व वरिष्ठ मौसम विज्ञानी अजय शुक्ला ने बताया कि बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बनने से एक बार फिर मध्य प्रदेश के पूर्वी क्षेत्र में मानसून की गतिविधियां बढ़ने लगेंगी। कम दबाव का क्षेत्र झारखंड होते हुए आगे बढ़ेगा। इसके प्रभाव से बुधवार से मध्यम स्तर की वर्षा होने का सिलसिला शुरू हो सकता है। शुक्रवार से पूरे प्रदेश में मध्यम स्तर की वर्षा होने के आसार हैं।

सामान्य से एक प्रतिशत कम हुई है वर्षा

बता दें कि इस सीजन में एक जून से लेकर बुधवार सुबह साढ़े आठ बजे तक मध्य प्रदेश में कुल 906.5 मिमी. वर्षा हुई है। जो सामान्य वर्षा (917.9 मिमी.) की तुलना में एक प्रतिशत कम है। इसमें पूर्वी मप्र में अभी तक 960.8 मिमी। वर्षा हुई है। जो सामान्य वर्षा 1012.0 मिमी. के मुकाबले पांच प्रतिशत कम है। पश्चिमी मप्र में 864.8 मिमी. वर्षा हो चुकी है। जो सामान्य वर्षा 845.5 मिमी. की तुलना में दो प्रतिशत अधिक है।

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