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छतरपुर के फर्नीचर उत्पाद को मिलेगी पहचान उद्यम विभाग और नेशनल डिजाइन संस्थान के बीच हुआ करार

छतरपुर। एक जिला एक उत्पाद के तहत छतरपुर के प्रसिद्ध फर्नीचर उत्पाद को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजार उपलब्ध करवाने के लिए सूक्ष्म, लघु, मध्यम उद्यम विभाग और नेशनल डिजाइन संस्थान के बीच पिछले दिनों करार हुआ है। इससे यहां के फर्नीचर डिजाइन और उत्पाद को नया मंच मिलेगा व स्थानीय कारीगरों को राष्ट्रीय स्तर का बाजार मिल सकेगा, यहां का फर्नीचर बेहतर कलात्मकता के साथ डिजाइन किया जाता है।

नए करार से पलंग, ड्रेसिंग टेबल, सोफा जैसे बड़े उत्पादों को राष्ट्रीय अंतराष्ट्रीय बाजार के अनुसार डिजाइन कर स्थानीय कारीगर अधिक मुनाफा कमा सकेंगे। जिले में सागोन, साकू का जंगल है, जिससे फर्नीचर तैयार होता है। करीब 200 छोटी-बड़ी फर्नीचर की दुकानें और उद्योग हैं।

फर्नीचर एक्सपर्ट से दिलाया जाएगा प्रशिक्षण

नेशनल डिजाइन संस्थान के फर्नीचर डिजाइनरों से छतरपुर के कारीगरों को माइक्रो फर्नीचर डिजाइन का प्रशिक्षण दिलाया जाएगा। समय-समय पर छतरपुर से तैयार होने वाले फर्नीचर उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रदर्शित किया जा सकेगा। करार से छतरपुर में बड़े उत्पादों के साथ छोटे उत्पाद भी तैयार कराए जाएंगे, ये ऐसे उत्पाद होंगे जिनकी पैकिंग आसानी से की जा सके और एक्सपोर्ट करने में परेशानी नहीं आए। बेहतर कलात्मकमा के साथ फर्नीचर उत्पाद तैयार करके उनको बाजार उपलब्ध कराना इस करार का मुख्य उदद्देश्य रहेगा।

पहले भी हुए हैं प्रयास

छतरपुर के फर्नीचर को बढ़ावा देने के लिए पहले भी प्रयास किए हैं। लघु उद्योग विभाग से कई लोगों को जमीनें भी दी गईं, लेकिन यह योजना परवान नहीं चढ़ सकी। फर्नीचर व्यवसायी कमलेश विश्वकर्मा का कहना है कि यहां फर्नीचर उद्योग के क्षेत्र में बेहतर किया जा सकता है। यह जिले का मुख्य उत्पाद है, लेकिन मांग होने के बावजूद वर्तमान में यह छतरपुर तक ही सीमित होकर रह गई है।

छोटे उत्पादों से जोड़ना उद्देश्य

छतरपुर जिले में फर्नीचर उद्योग को बढ़ावा देने के लिए सरकार प्रयास करती रही है, लेकिन यहां के कारीगर या व्यवसायियों ने प्रशिक्षण में रुचि नहीं दिखाई। अब छोटे उत्पादों से कारीगरों को जोड़ने पर फोकस किया जाएगा, जल्द ही छतरपुर का बाजार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चमकेगा।

आशुतोष गुप्ता, महाप्रबंधक, उद्योग विभाग छतरपुर

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