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मध्यप्रदेश

हाईकोर्ट ने तथ्य छिपाकर प्रस्तुत याचिका जुर्माना लगाकर की निरस्त

जबलपुर। हाई कोर्ट ने एक ही बिंदु पर पूर्व के तथ्यों को छिपाकर दोबारा याचिका दायर करने के मामले को गम्भीरता से लिया। मुख्य न्यायाधीश रवि विजय मलिमठ व न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की युगलपीठ ने पिछली सुनवाई पर आवेदक से पूछा था कि क्यों न दस लाख जुर्माना लगाकर याचिका निरस्त कर दी जाए। मामले में मंगलवार को सुनवाई करते हुए न्यायालय ने दस हजार रुपये जुर्माने के साथ दायर याचिका निरस्त कर दी।

2017 में खदान आवंटन को दी थी चुनौती

खंडवा के अर्जुनदास नेभनानी ने 2017 में खदान आवंटन को चुनौती दी थी। यह खदान आशुतोष बंसल को आवंटित हुई थी। कोर्ट ने उचित फोरम में जाने की सलाह दी थी। अनावेदक बंसल की ओर से न्यायालय को बताया गया कि याचिकाकर्ता ने माइनिंग विभाग के समक्ष अपील पेश की। निरस्त होने के बाद राजस्व विभाग के समक्ष रिवीजन प्रस्तुत की, रिवीजन निरस्त होने के बाद याचिकाकर्ता ने दोबारा उसी मुद्दे पर 2021 में याचिका दायर कर दी। इतना ही नहीं अपील और रिवीजन के संबंध में जो फैसला हुआ उसके संबंध में इस याचिका में उल्लेख भी नहीं किया। उक्त जानकारी पर न्यायालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आवेदक के रवैये को आड़े हाथों लेते हुए जुर्माने के साथ याचिका निरस्त कर दी।

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