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श्री मद् भागवत में श्रीकृष्ण-रुक्मणी विवाह प्रसंग सुन भाव विभोर हुए श्रोता।

गोहद भिंड ग्राम शेरपुर में बीजासन माता प्रांगण में चल रही भागवत कथा में पूज्य आचार्य प्रमोद कृष्ण शास्त्री द्वारा रुकमणी विवाह प्रसंग सुनाया जिसको सुनकर श्रद्धालु भक्त भावविभोर हुए यह कथा 21 अप्रैल से बिजासन मंदिर प्रांगण में ग्राम शेरपुर में चालू है आज कथा के अंतिम दिन श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा कथा का आयोजन संपूर्ण ग्राम वासियों के सहयोग से किया जा रहा है 28 अप्रैल को पूर्णाहुति व भंडारा है कृष्ण-रुक्मणी का वेश धारण किए बाल कलाकारों पर भारी संख्या में आए भक्तजनों ने पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। *श्रद्धालुओं ने विवाह के मंगल गीत गाए।* कथा प्रसंग में व्यास जी ने कहा कि रुक्मणी विदर्भ देश के राजा भीष्म की पुत्री और साक्षात लक्ष्मी जी का अवतार थी। रुक्मणी ने जब देवर्षि नारद के मुख से श्रीकृष्ण के रूप, सौंदर्य एवं गुणों की प्रशंसा सुनी तो उसने मन ही मन श्रीकृष्ण से विवाह करने का निश्चय किया। रुक्मणी का बड़ा भाई रुक्मी श्रीकृष्ण से शत्रुता रखता था और अपनी बहन का विवाह चेदि नरेश राजा दमघोष के पुत्र शिशुपाल से कराना चाहता था। रुक्मणी के संज्ञान में जब यह बात आयी तो उन्होंने एक ब्राह्मण संदेशवाहक द्वारा श्रीकृष्ण के पास अपना परिणय संदेश भिजवाया। तब श्रीकृष्ण विदर्भ देश की नगरी कुण्डिनपुर पहुंचे और वहां बारात लेकर आए शिशुपाल व उसके मित्र राजाओं शाल्व, जरासंध, दंतवक्त्र, विदु रथ और पौंड्रक को युद्ध में परास्त करके रुक्मणी का उनकी इच्छा से हरण कर लाए। वे द्वारिकापुरी आ ही रहे थे कि उनका मार्ग रुक्मी ने रोक लिया और कृष्ण को युद्ध के लिए ललकारा। तब युद्ध में श्रीकृष्ण व बलराम ने रुक्मी को पराजित करके दंडित किया। तत्पश्चात श्रीकृष्ण ने द्वारिका में अपने संबंधियों के समक्ष रुक्मणी से विवाह किया

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