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छत्तीसगढ़

फर्जी तरीके से बेचा 219 कट्टा धान, खाते में पहुंचे 1.75 लाख रूपए

राजनांदगांव: जमीन को बटाई पर देने के बाद फर्जी तरीके से 219 कट्टा धान बेचे जाने का मामला पेश सामने आया है। शिकायत सामने आते ही तहसीलदार प्रफुल्ल गुप्ता के निर्देश पर जांच के निर्देश दिए हैं। जानकारी के अनुसार चवेली गांव में अवैध रूप से धान बिक्री किए जाने की खबर के बाद पटवारी ने पंचनामा तैयार किया है। जिसके बाद से यह बात प्रमाणित हुई है कि किसान ने पहले से ही अपने खेत को बटाई पर दी थी और जिन किसानों ने खेत को रेगहा पर लिया है। उनके द्वारा धान नहीं बेची गई है। उसके बाद भी उसी ऋण पुस्तिका और रकबे पर धान को बेच दिया गया है।

बताया गया है कि पिछले साल भी अनीस खान ने धान बेच दी थी। ग्रामीण ने बताया कि अनीस खान ने धान कहा से लाया है, उन्हें पता नहीं यह जांच का विषय है। इस संबंध में किसानों का कहना था कि कई सालों से धान बेची जा रही है। अब जांच के बाद ही खुलासा हो सकेगा। सहकारी समिति के समिति प्रबंधक सेवकराम देवदास ने बताया कि अनीस खान द्वारा 219 कट्टा धान बेचा गया है। 1 लाख 78 हजार रूपए ऑनलाइन उनके खाते में चला गया है। उन्होंने ही टोकन लिया है और धान बेचने भी वही आए थे।

तहसीलदार के निर्देश पर जांच करने पहुंचे पटवारी रामलाल कुमार ने बताया कि डूमरडीह सोसायटी में किसान अनीस खान ने 5.86 डिसमिल जमीन बटाई पर दी थी। उस जमीन के किसानों ने अभी धान नहीं बेचा है। पंचनामा तैयार कर लिया गया है। बटाई लेने वाले किसान टिकेश्वर पटेल ने बताया कि उनके द्वारा सवर्णा धान बोई गई है। अभी उन्होंने धान नहीं बेची है। उन्हें पता चला है कि उस खसरे पर अनीस खान ने धान बेची है।

शक के दायरे में ‘सरकारी अधिकारी” 

वहीं किसान शोभाराम ने बताया कि अनीस खान ने पिछले साल भी धान बेचा था। उनके द्वारा कहां से धान लाया गया है, यह नहीं मालूम। उनके बटाई द्वारा ली गई जमीन से अभी धान नहीं बिकी है। छत्तीसगढ़ सरकार एक ओर जहां किसानों के हित में कई योजनाएं चला रही है, वहीं सरकारी विभाग में कार्यरत कर्मी ही सरकार के साथ फर्जीवाड़ा कर लाखों का चूना लगा रहे हैं।

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