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मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर तीर्थ स्नान और दान से मिलता है कई यज्ञ करने जितना पुण्य।

8 दिसंबर को अगहन महीने की पूर्णिमा है। इस दिन स्नान-दान, व्रत और भगवान विष्णु की पूजा करने की परंपरा है। पुराणों में कहा गया है कि इस पूर्णिमा पर स्नान और दान करने से कई यज्ञ करने जितना पुण्य मिलता है। इस तिथि पर भगवान विष्णु और कृष्ण की पूजा केशव रूप में करनी चाहिए। साथ ही पूजा में शंख से अभिषेक करें। इस दिन व्रत रखने से सेहत में सुधार होता है। मार्गशीर्ष पूर्णिमा का महत्व पूरे महीने पूजा-पाठ और व्रत करने वालों के लिए पूर्णिमा का दिन सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इस दिन तीर्थ या किसी पवित्र नदी में स्नान कर के दान करने से पापों का नाश होता है। इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा और कथा करने से भी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर गीता पाठ करने का भी महत्व है। इस दिन गीता पाठ करने से पितर तृप्त होते हैं। तुलसी की मिट्टी से नहाने का विधान पुराणों के मुताबिक इस पूर्णिमा पर तुलसी के पौधे के जड़ की मिट्टी से पवित्र सरोवर में स्नान करने का विधान बताया गया है। ऐसा करने से भगवान विष्णु की कृपा मिलती है। नहाते वक्त ऊं नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करना चाहिए। साथ ही इस दिन व्रत और श्रद्धानुसार दान करने की भी परंपरा है। इससे जाने-अनजाने में हुए पाप और अन्य दोष खत्म हो जाते हैं मार्गशीर्ष पूर्णिमा की पूजा विधि इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर नहाएं। फिर घर में गंगाजल छिड़कें। तुलसी के पौधे में जल चढ़ाएं और प्रणाम कर के तुलसी पत्र तोड़कर भगवान विष्णु को अर्पित करें। ताजे कच्चे दूध में गंगाजल मिलाकर भगवान विष्णु-लक्ष्मी, श्रीकृष्ण और शालग्राम का अभिषेक करें। अबीर, गुलाल, अक्षत, चंदन, फूल, यज्ञोपवित, मौली और अन्य सुगंधित पूजा साम्रगी के साथ भगवान की पूजा करें। सत्यनारायण भगवान की कथा कर के नैवेद्य लगाएं और आरती के बाद प्रसाद बांटें।

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