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हरियाणा

कभी गवाही पर नहीं आया पीड़ित; गवाहों-सबूतों के आधार पर 7 साल की सजा

पानीपत: हरियाणा के पानीपत जिले की कोर्ट ने हत्या के प्रयास के एक दोषी को सजा सुनाई है। बड़ी बात यह है कि इस केस में पीड़ित चौकीदार द्वारा केस दर्ज करवाने के बाद दोबारा न ही थाने में आया और न ही वह कोर्ट में कभी गवाही पर आया था। कई बार कोर्ट ने उसे नोटिस भी भेजा।अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायधीश निशांत शर्मा की अदालत ने गवाहों की गवाही पर ही दोषी को 7 साल की कैद व 15 हजार रुपए जुर्माना की सजा सुनाई है। जुर्माना न देने पर दोषी को एक साल की अतिरिक्त जेल काटनी होगी।फैक्ट्री के पास घूमने का कारण पूछने पर चलाई थी गोलीजिला न्यायवादी राजेश चौधरी ने बताया कि 23 अगस्त 2018 को मूल रूप से मेरठ के गांव रामराज के रहने वाले शुभम पुत्र चंदकरण ने चांदनीबाग थाना पुलिस को दी शिकायत में बताया था कि वह सेक्टर 25 पार्ट वन में फैक्ट्री का गार्ड है। 22 अगस्त की रात को एक व्यक्ति उनकी फैक्ट्री की दीवार के पास घूम रहा था। उसने उस व्यक्ति से वहां घूमने का कारण पूछा तो उस व्यक्ति ने उस पर गोली चला दी, लेकिन फायर मिस हो गया। उसकी जान बच गई।उससे शोर मचाया तो वहां दूसरी फैक्ट्री से दीपक व अमित आ गए। उसने दोनों को वारदात के बारे में बताया। उन तीनों ने उसका पीछा कर उसे पकड़ लिया और पुलिस कंट्रोल रूम में कॉल कर दी।2 गवाहों ने दिलवाई सजासूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और पुलिस ने उसके पास से पिस्तौल व 3 गोलियां बरामद कर ली थी। उसकी पहचान मुसरफ पुत्र यासीन निवासी गांव गढ़ी बेसिक के रूप में हुई। पुलिस ने उस पर केस दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया था। मामला कोर्ट में गया।शिकायतकर्ता ‌शुभम एक भी तारीख पर कोर्ट में पेश नहीं किया। उसने एक गवाही भी नहीं दी। इस मामले के गवाह दीपक व ‌अमित थे। इन दोनों की गवाही पर चार साल ढाई माह चली मामले की सुनवाई के बाद मंगलवार को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायधीश निशांत शर्मा ने दोषी मुसरफ पुत्र यासीन निवास गांव गढ़ी बेसिक को सात साल की कैद व 15 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है।

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