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ईश्वर दर्शन कर आवागमन के बंधन से मुक्त हो जाना ही मानव जीवन का उद्देश्य है – साध्वी मेरुदेवा भारती जी

दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के संस्थापक एवं संचालक गुरुदेव श्री आशुतोष महाराज जी के दिव्य मार्गदर्शन में सात दिवसीय श्रीमद भागवत कथा का आयोजन 14 से 20 नवंबर तक दोपहर 1 बजे से सायं 4 चार बजे तक गोवेर्धन गार्डन, गोपालपुरा में किया जा रहा है l कथा व्यास साध्वी सुश्री मेरुदेवा भारती जी ने आज कथा के प्रथम दिवस आत्मदेव के प्रसंग को भक्तों के समक्ष रखते हुए कहा कि आत्मदेव ने सदैव ईश्वर से संतान की मांग की, संसार के सुख की मांग की, संतों के समझाने पर भी वह ईश्वर भक्ति की ओर नहीं बढ़े और परिवार व अपने ही पुत्र के द्वारा दुखी रहे l अशांत रहे l इसलिए संतों ने कहा कि यदि आप सुख पाना चाहते हो, तो वह संसार में नहीं बल्कि ईश्वर की प्राप्ति में मिलेगा l क्योंकि संसार का सुख तो मात्र एक बाहरी आवरण है, जो अपने भीतर दुःख को समेटे हुए है l इसलिए जिसने भी ईश्वर से सुख की मांग की है वह दुखी ही रहा है l क्योंकि सुख में दुःख छुपा है l इसलिए संतो ने कहा "यतन सब सुख के किए दुःख का किया न कोई l तुलसी यह अचरज है अधिक अधिक दुःख होए l l " इसलिए सुख का स्त्रोत मात्र वह ईश्वर ही है l जब मनुष्य ईश्वर की प्राप्ति कर लेता है तो वह दुःख में भी आनंद से रहता है l वह दुःख के पल में भी ईश्वर का अनुभव करता है l इसलिए यदि यह जीवन मिला, यह मानव का तन मिला है तो इसे सार्थक कर लें l ईश्वर से ईश्वर की मांग करें l शाश्वत सुख को प्राप्त कर, ईश्वर का दर्शन कर आवागमन के बंधन से मुक्त हो l तभी मानव तन सार्थक हो पायेगा l और इस संसार में आने का उद्देश्य भी पूर्ण हो पायेगा l इसलिए सदा भगवान से भगवान की ही मांग करें l

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