ब्रेकिंग
जनपद कार्यालय बना अखाड़ा! सीईओ ने तीन जनपद सदस्यों पर धमकी और अभद्रता का कराया मामला दर्ज दिल्ली के होटल में भीषण आग, 21 मौतों की खबर से हड़कंप प्यासी मुरैना और पानी में मस्ती! समर वेव वॉटर पार्क पर उठने लगे सवाल मुरैना सगाई पक्की होते ही दूल्हे पर हमला लड़की देखकर लौट रहे युवक को घेरकर बदमाशों ने पीटा, चेन-अंगू... बामौर थाना : तेज रफ्तार ट्रैक्टर ने बुजुर्ग को मारी टक्कर दिमनी थाना : जहरीला पदार्थ खाने से वृद्ध की मौत, जांच शुरू पोरसा थाना : कट्टा लेकर घूम रहे युवक को पुलिस ने दबोचा सगाई की खुशियों के बीच करोड़ों की चोरी से सनसनी बीजेपी नेता के भाई के घर दिनदहाड़े वारदात सरकारी जमीन विवाद में खूनी संघर्ष, फायरिंग में युवक की मौत, दो महिलाएं घायल मुरैना: सबलगढ़ के गुरैमा गांव में भीषण आग, ग्रामीणों की तत्परता से टला बड़ा हादसा
छत्तीसगढ़

महिलाओं ने की आंवले के पेड़ की पूजा;ये वृक्ष विष्णु और शिव दोनों को बेहद प्रिय

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM}- आंवले के पेड़ के नीचे बैठकर किया जाता है भोजन।गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिले में बुधवार को आंवला नवमी का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। ये त्योहार दीपावली के नौवें दिन मनाया जाता है। आज के दिन महिलाएं आंवले के पेड़ के नीचे बैठकर सपरिवार भोजन करती हैं। भोजन से पहले विधिवत तरीके से आंवले के पेड़ की पूजा और उसकी परिक्रमा की जाती है।महिलाएं आंवले के पेड़ की पूजा कर भगवान से खुशहाल जीवन की प्रार्थना करती हैं। जिले के दत्तात्रेय परिसर, इंदिरा उद्यान, मलनिया सहित धनौली के सिद्ध बाबा आश्रम में बुधवार सुबह से ही लोगों की भीड़ लगी हुई है और लोग आंवला नवमी का त्योहार सपरिवार मना रहे हैं। आंवला नवमी पर आंवले के वृक्ष की पूजा और इसके नीचे भोजन करने की परंपरा शुरू करने वाली माता लक्ष्मी मानी जाती हैं।महिलाओं ने की आंवले के पेड़ की पूजा।पौराणिक कथा के अनुसार एक बार माता लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करने आईं। रास्ते में भगवान विष्णु एवं शिव की पूजा एक साथ करने की उनकी इच्छा हुई। लक्ष्मी मां ने विचार किया कि एक साथ विष्णु और शिव की पूजा कैसे हो सकती है। तभी उन्हें ख्याल आया कि तुलसी और बेल के गुण एक साथ आंवले में पाए जाते हैं। तुलसी श्री हरि विष्णु को अत्यंत प्रिय है और बेल भगवान भोलेनाथ को, इसलिए आंवले के वृक्ष को विष्णु और शिव का प्रतीक चिह्न मानकर मां लक्ष्मी ने आंवले के वृक्ष की पूजा संपन्न की।आंवले के पेड़ की पूजा करती हुई महिलाएं।मां लक्ष्मी की पूजा से प्रसन्न होकर श्री विष्णु और शिव प्रकट हुए। लक्ष्मी माता ने आंवले के वृक्ष के नीचे भोजन बनाकर विष्णु और भगवान शिव को भोजन कराया। इसके बाद खुद भी आंवले के पेड़ के नीचे भोजन किया। उस दिन कार्तिक शुक्ल पक्ष की नवमी का दिन था। तभी से आंवले के वृक्ष के पूजन की परम्परा चली आ रही है। अक्षय नवमी के दिन यदि आंवले की पूजा करना और इसके नीचे बैठकर भोजन बनाना और खाना संभव नहीं हो, तो इस दिन कम से कम आंवला जरूर खाएं।धार्मिक ग्रंथों में आंवले का महत्वपद्म पुराण के अनुसार यह पवित्र फल भगवान श्री विष्णु को प्रसन्न करने वाला और शुभ माना गया है। इसे खाने मात्र से मनुष्य सब पापों से मुक्त हो जाते हैं। आंवला खाने से आयु बढ़ती है। उसका रस पीने से धर्म संचय होता है और उसके जल से स्नान करने से दरित्रता दूर होती है और हर तरह का ऐश्वर्य प्राप्त होता है।आंवले के दर्शन, स्पर्श और उसके नाम का उच्चारण करने से वरदायक भगवान श्री विष्णु अनुकूल हो जाते हैं। जहां आंवले का फल मौजूद होता है, वहां भगवान श्री विष्णु सदा विराजमान रहते हैं और उस घर में ब्रह्मा एवं सुस्थिर लक्ष्मी का वास होता है, इसलिए अपने घर में आंवला जरूर रखना चाहिए।

Related Articles

Back to top button