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मुरैना जिला चिकित्सालय: मरीजों की जान से खिलवाड़, सीएमएचओ और सिविल सर्जन की सुस्त कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल
मुरैना। मुरैना जिला चिकित्सालय, जो कभी संभाग के स्वास्थ्य तंत्र की रीढ़ माना जाता था, आज प्रशासनिक लापरवाही और उदासीनता की भेंट चढ़ चुका है। अस्पताल की बदहाल व्यवस्थाओं को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि यहाँ पदस्थ मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) और सिविल सर्जन का नियंत्रण पूरी तरह खत्म हो चुका है। मरीजों की सुविधाओं के नाम पर केवल खानापूर्ति हो रही है और सरकारी धन का बंदरबांट जारी है। अव्यवस्थाओं का आलम अस्पताल में प्रवेश करते ही गंदगी का साम्राज्य और बदबू से मरीजों का दम घुटने लगता है। आए दिन मरीजों को दवाइयाँ बाहर से लाने के लिए मजबूर किया जाता है, जबकि शासन की ओर से अस्पताल में पर्याप्त दवाओं का स्टॉक उपलब्ध होने का दावा किया जाता है। क्या सीएमएचओ और सिविल सर्जन को यह नहीं दिखता कि गरीब मरीज दवाइयों के लिए दर-दर भटक रहे हैं? वार्डों में बेड की कमी और टूटे हुए फर्नीचर मरीजों की दुर्दशा की कहानी खुद बयां कर रहे हैं। जिम्मेदारी से कन्नी काटते अधिकारी अस्पताल के उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों का काम केवल फाइलों के निपटान तक सिमट कर रह गया है। न तो ओपीडी (OPD) में समय पर डॉक्टर मिलते हैं और न ही आपातकालीन स्थिति में नर्सिंग स्टाफ तत्पर रहता है। अक्सर यह शिकायतें आम हैं कि ड्यूटी के दौरान डॉक्टर गायब रहते हैं और पर्चियों पर केवल महंगी निजी मेडिकल स्टोरों की दवाइयां लिखी जा रही हैं। सिविल सर्जन का कार्यालय केवल नाम का है, जहाँ किसी भी समस्या को सुलझाने के बजाय उसे टालने का प्रयास किया जाता है। जांच के नाम पर लीपापोती जनता की गाढ़ी कमाई से चलने वाले इस चिकित्सालय में 'रेफरल सेंटर' का ठप्पा लग चुका है। मामूली बीमारियों के लिए भी मरीजों को ग्वालियर या दिल्ली रेफर कर दिया जाता है, जिससे गरीब परिवार अपनी जमा-पूंजी गंवा देते हैं। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए आए बजट का आखिर उपयोग कहाँ हो रहा है? क्या यह प्रशासनिक भ्रष्टाचार नहीं है? बदलाव की सख्त आवश्यकता समय आ गया है कि जिला प्रशासन और राज्य स्वास्थ्य विभाग इस गंभीर मामले का संज्ञान ले। सीएमएचओ और सिविल सर्जन की कार्यप्रणाली की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यदि अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले समय में आम जनता सड़कों पर उतरने को मजबूर होगी।


