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अटल बिहारी वाजपेयी : काव्य, कूटनीति और संप्रभु भारत का स्वप्न डॉ. भूपेन्द्र कुमार सुल्लेरे

16 अगस्त, 2018 को अटल बिहारी वाजपेयी इस संसार से विदा हो गए, परंतु उनके विचार, उनकी कविताएँ और उनकी नीतियाँ आज भी भारत के लिए पथप्रदर्शक बनी हुई हैं। वे ऐसे नेता थे जिनमें कवि का हृदय, विचारक का मस्तिष्क और राजनेता का साहस एक साथ विद्यमान था। उनकी पुण्यतिथि केवल श्रद्धांजलि का दिन नहीं, बल्कि उनके योगदान और भारत की वैश्विक नीति पर उनके दृष्टिकोण को याद करने का अवसर है। कवि और राजनेता का अद्भुत संगम अटल जी की कविताएँ केवल भावनाओं का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय दृष्टिकोण का प्रतीक थीं। “हार नहीं मानूँगा, रार नहीं ठानूँगा” जैसी रचनाएँ भारत की जिजीविषा और आत्मबल का उद्घोष थीं। “आओ फिर से दिया जलाएँ” स्वतंत्र भारत के पुनर्निर्माण और आशा का संदेश देती हैं। “मौत से ठन गई” जीवन-मृत्यु के संघर्ष से भी हार न मानने की अटल प्रवृत्ति को उजागर करती है। उनकी कविताएँ राष्ट्र की आत्मा को छूती थीं और यही संवेदनाएँ उनके राजनीतिक निर्णयों में परिलक्षित हुईं। वैश्विक नीति पर भारत का दृष्टिकोण वाजपेयी प्रधानमंत्री के रूप में भारत की विदेश नीति को नई ऊँचाइयों तक ले गए। पोखरण परमाणु परीक्षण (1998): विश्व के विरोध के बावजूद भारत ने अपनी संप्रभुता को बनाए रखते हुए यह परीक्षण किया। अमेरिका, जापान और यूरोपीय देशों के प्रतिबंधों के बीच भी वाजपेयी ने स्पष्ट किया—“भारत अपने राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करेगा।” पाकिस्तान नीति: वाजपेयी ने बस यात्रा कर लाहौर जाकर शांति का हाथ बढ़ाया, परंतु कारगिल युद्ध में पाकिस्तान को कठोर उत्तर देकर यह सिद्ध किया कि भारत शांति चाहता है लेकिन अपनी सुरक्षा और संप्रभुता से कभी समझौता नहीं करेगा। चीन और पड़ोसी नीति: उन्होंने ‘गुजराल सिद्धांत’ से आगे बढ़कर संवाद और संतुलन पर आधारित संबंध बनाए रखे, परंतु रणनीतिक हितों को सदा सर्वोपरि रखा। अमेरिका और पश्चिमी देश: परमाणु परीक्षण के बाद प्रारंभिक तनाव को दूर कर उन्होंने भारत-अमेरिका संबंधों को एक नई दिशा दी। इसके परिणामस्वरूप भारत एक उभरती वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित हुआ। भारत की संप्रभुता और राष्ट्र-निर्माण वाजपेयी के नेतृत्व में भारत ने विश्व को यह संदेश दिया कि लोकतंत्र और विकास साथ-साथ चल सकते हैं। गोल्डन क्वाड्रिलेटरल परियोजना से भारत के आर्थिक इंफ्रास्ट्रक्चर को गति मिली। सूचना प्रौद्योगिकी और दूरसंचार के क्षेत्र में क्रांति का मार्ग प्रशस्त हुआ। ग्रामीण विकास और कनेक्टिविटी को मजबूत किया, जिससे भारत की आत्मनिर्भरता को बल मिला। उन्होंने बार-बार कहा—“भारत को कोई झुका नहीं सकता, हम अपनी संप्रभुता की रक्षा हर परिस्थिति में करेंगे।” कवि-हृदय से वैश्विक दृष्टिकोण तक अटल जी के भाषणों और कविताओं में हमेशा वैश्विक शांति और मानवता की चिंता झलकती थी। वे मानते थे कि भारत की विदेश नीति केवल शक्ति-प्रदर्शन तक सीमित न होकर “विश्व मानव कल्याण” की दिशा में होनी चाहिए। यही कारण है कि उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिंदी में भाषण देकर भारत की सांस्कृतिक संप्रभुता को भी विश्व मंच पर स्थापित किया। अटल जी की विरासत लोकतांत्रिक संवाद और मर्यादा की राजनीति। भारत की संप्रभुता की रक्षा करते हुए विश्व के साथ संतुलित संबंध। कविताओं के माध्यम से राष्ट्र को प्रेरित करने का अनोखा उदाहरण। विकास, सुरक्षा और संस्कृति का संतुलन। अटल बिहारी वाजपेयी का जीवन भारत की संप्रभुता, लोकतंत्र और विश्व शांति के आदर्शों का अद्भुत संगम है। उनकी कविताएँ भावनाओं को जगाती हैं, उनकी नीतियाँ भारत को वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित करती हैं और उनकी स्मृति आज भी हर भारतीय को यह संकल्प देती है कि— “हमारा भारत विश्व में शांति, शक्ति और संस्कृति का ध्वजवाहक बना रहेगा।”

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