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गरीबों की आजीविका का साधन है ककोडा चंबल में उगता है ताकतवर ककोड़ा, बारिश में बिना खेती ही कमाई का बना जरिया
गरीबों की आजीविका का साधन है ककोडा चंबल में उगता है ताकतवर ककोड़ा, बारिश में बिना खेती ही कमाई का बना जरिया पूरी तरह जैविक व पौष्टिक तत्वों से है भरपूर सब्जी में मीट से भी ज्यादा ताक़त, तथा ककोडा खाने से कैंसर रोग भी नहीं होता है, हार्डअटैक की संभावना कम हो जाती है। इसलिए सीजन में दो बार ककोडा जरूर खाएं चंबल अंचल में करीब-करीब 200 टन ककोडा होता है। जिससे हमारे गरीबों की आजीविका भी चलती है। और उनके खाने में प्रयुक्त होते हैं देशी जड़ी बूटियां कंदमूल फल खाने के वजह से ही यहां के लोग कम बीमार पड़ते हैं। तथा जिस्मानी रूप से बड़े सशक्त और मजबूत होते हैं। चित्र में या व्यक्ति मोगिया समुदाय का है मालिक राम इस नै बताया कि मुझे कभी बुखार भी नहीं आता है। चंबल नदी में प्रतिवर्ष बाढ़ आने से भी इस अंचल को कुछ नुकसान होते हैं तो कुछ विशेष फायदे भी होते हैं जैसे चंबल नदी हजारों तरह के बीजों को बहा कर लाती है वह प्रजातियां यहां जमती है। चंबल बाढ़ के साथ में मिट्टी पने के रूप में डाल जाती है। जिससे यहां के किसानों की खेती बहुत अच्छी होती है। सबसे बड़ा फायदा यह होता है के यहां का वाटर लेवल बहुत अच्छा हो जाता है और अरबों खरबों का रेत भी आती है चंबल के सीने को फाड़ कर बीहडौ को समतल करके लोग जो ग्राम बनाकर वसे हुए हैं। वह बाढ़ से प्रभावित होते हैं। जान माल का नुकसान होता है। किंतु हमें यह समझने की जरूरत है के वह तो चंबल मैया का आंचल है। उस आंचल को फाड़ के बसोंगे तो परेशानी और जान माल का खामियाजा तो भोगना ही पड़ेगा चंबल मैया यहां के लिए वरदान इसलिए भी है कि यह भारत की सबसे स्वच्छ नदी होने के कारण कुछ जली जीव यही होते हैं जैसे घड़ियाल विश्व के 95% इसी नदी में पाए जाते हैं। डॉल्फिन और मौर मछली भी है।साथ ही चंबल के अंचल में गरीबौ के लिए वरदान के रूप में गूगल प्रजाति भी फलती फूलती है। जो कि आयुर्वेदिक दावों के लिए राजा के रूप में जानी जाती है




