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मुरैना भीषण गर्मी और लू के बीच चौराहों पर डटे हैं ट्रैफिक सिपाही चौराहों पर नहीं हैं ट्रैफिक बूथ।

(धर्मेंद्र सिंह सिकरवार ''सीताराम जी'') मुरैना , यातायात व्यवस्था सुदृण कराने के लिए भीषण गर्मी और लू के बीच ट्रैफिक सिपाही चौराहों पर डटे हैं। चौराहों पर ट्रैफिक बूथों का इंतजाम त नहीं है शहर पुलिस कर्मियों की दिक्कतों को लेकर पुलिस विभाग या समाजसेवी संगठन को सोंचना चाहिए ट्रेफिक पुलिस के पास पोइंट पर पीने का पानी व बैठने की कोई व्यवस्था नहीं एयर कंडीशनर आफिस में बैठे उच्च अधिकारियों को इसको संज्ञान में लेना चाहिए सूरज की तपिश अब इस सुबह से हर किसी को झुलसाने लगी है। दोपहर होने तक तो ये भीषण गर्मी आग के शोलों से कम नहीं है। आग उगलती गर्मी में अगर सड़क पर कोई अपनी ड्यूटी निभाता नजर आता है, तो वह हैं ट्रैफिक सिपाही। हैरानी की बात ये है इन पुलिस वालों की दिक्कतों को लेकर किसी को कोई चिंता नहीं है। न तो पुलिस विभाग ही चिंतित है और न किसी समाजसेवी संगठन को इनका कोई ख्याल है। अगर ट्रैफिक बूथों का इंतजाम हो जाए तो गर्मी से इन पुलिस वालों को बचाया जा सकता है शुक्रवार की सुबह 12 बजे का समय था। इस वक्त तक तापमान 39 डिग्री तक पहुंच चुका था। हर कोई धूप से बचने की जुगत में था, इस गर्मी में अगर कोई चौराहे पर दिखा तो वह ट्रैफिक पुलिसकर्मी।चौराहे पर जाम की स्थिति पैदा न हो इसलिए कड़ी धूप में ट्रैफिक पुलिस कर्मी खड़े होकर ट्रैफिक को निकलवा रहे थे। जैसे ही ट्रैफिक कुछ कम नजर आता ये पुलिसकर्मी गर्मी से बचने के लिए फल की ढकेल के पास कुर्सियों पर आकर कुछ देर के लिए बैठ जाते। मगर चौराहे पर ट्रैफिक ज्यादा रहता है, इसलिए वक्त बैठने को कम मिल पाता है। फिर काम में लग जाते उच्च अधिकारियों को इसको संज्ञान में लेकर बेकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए

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