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मध्यप्रदेश

जिला पंचायत सदस्य तरूण बाहेती ने खेतों में जाकर देखें हालात, कहा, नुकसानी के सर्वे में रखें पादर्शिता

नीमच: नीमच जिले में बीते तीन दिनों से आफत की बारिश से फसलों को चौपट कर दिया है। खासकर सोयाबीन की फसल बर्बाद हो चुकी है। किसानों को फसल नुकसान का उचित मुआवजा या बीमा क्लेम मिले, इसके लिए प्रशासन नुकसानी के सर्वे में पारदर्शिता का पूरा ध्यान रखें। ताकि किसानों को परेशान नहीं होना पड़े।यह बात कांग्रेस नेता व जिला पंचायत सदस्य तरूण बाहेती ने लगातार बारिश से सोयाबीन आदि की फसलों को हुए नुकसान की खबर मिलने बाद खेतों का जायजा लेने और किसानों से चर्चा करने के बाद कही। उन्होंने कहा कि मैंने अपने अपने निर्वाचन क्षेत्र में फसलों का जायजा लिया है। खेतों में काट कर रखी सोयाबीन की फसलों के साथ ही खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंचा। खेत तालाब बन चुके हैं।हालातों को देख किसानों की चिंता बढ गई है। क्योंकि पूर्व में अतिवृष्टि से फसलों को नुकसान हो चुका है, जिस पर राहत आयुक्त के निर्देश पर प्रशासन ने तहसीलदारों से नुकसानी का सर्वे भी कराया था, लेकिन विडंबना यह है कि अब तक सर्वे में जो नुकसान का आंकलन किया था, उसके भू अभिलेख और प्रशासन ने आंकड़े जारी नहीं किए हैं।टोल फ्री नंबर कोई नहीं उठाताबाहेती ने कहा कि फसल नुकसानी की जानकारी देने के लिए प्रशासन ने जिले में फसल बीमा करने वाली कंपनी के टोल फ्री नंबर जारी किए हैं, लेकिन किसानों ने मुझे बताया कि कई बार कोशिश करने के बाद भी फसल बीमा कंपनी का टोल फ्री नंबर कोई नही उठाता या लगातार व्यस्त आता है, जिसके कारण बीमा कंपनी को नुकसानी की जानकारी दर्ज नहीं करा पा रहे हैं।स्थिति को जिला पंचायत सदस्य बाहेती ने प्रशासन ने मांग की है कि किसानों को पहुंचे नुकसान की जानकारी के लिए बीमा कंपनी का टोल फ्री नंबर के अलावा बीमा कंपनी के अधिकारियों के नंबर भी जारी किए जाए, ताकि किसान उचित फोरम पर नुकसानी की शिकायत दर्ज करा सके।

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