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ये है पुराने भोपाल की गली पायगा जहां कभी नवाबों को बंधते थे घोड़े

भोपाल। पायगा यानी मवेशियों को बांधने या रखने की जगह। नवाबी रियासत के जमाने में भोपाल में चार पायगा (अस्तबल) हुआ करता था। यहां तक पहुंचने वाली गली, पायगा वाली गली कहलाती है। इतवारा की एक गली आज भी इसी नाम से जानी जाती है। सेवानिवृत्त सहायक वाणिज्य कर अधिकारी सैयद ताहा पाशा ने शहर की ऐतिहासिक इमारतों को, जो अब खंडहर हो गई हैं, अपनी फोटोग्राफी में संजोकर रखा है।

सैयद ताहा बताते हैं कि इतवारा की गली पायगा में अब चारों तरफ ऊंची इमारतें बन गई हैं, लेकिन जब नवाब के घोड़े यहां बांधे जाते थे, तब यहां चौड़ी सड़क और सुनसान इलाका हुआ करता था। आबादी बढ़ती गई और सड़क तंग होकर कब गली बन गई, पता ही नहीं चला। अब गली पायगा में अंदर जाने के लिए छोटे दरवाजे से गुजरना पड़ता है, यह उसी जमाने का बना है। पायगा के अंदर लगभग 40 बहुमंजिला इमारतों में लोग रहते हैं।

शहर की घनी आबादी वाले बुधवारा को इतवारा से जोड़ने वाली गली पायगा से गुजरते हुए आप जुमेराती, मंगलवारा होते हुए हमीदिया रोड तक जा सकते हैं। इस गली में आज भी पुराने दौर की कुछ इमारतें अच्छी हालत में कायम हैं और उनमें नीचे दुकानें और ऊपर लोग रह रहे हैं। इनका वास्तु देखने के लिए लोग यहां आते हैं। इसी गली में आगे चलकर मशहूर तब्बा मियां का महल आज भी फिल्मों की शूटिंग के लिए पहली पसंद बना हुआ है।

गली पायगा निवासी मोहम्मद सईद बताते हैं कि हम तीसरी पीढ़ी हैं और यहां 70 वर्षों से रह रहे हैं। हमारा मकान भी उसी जमाने का बना हुआ है। उस समय यह जगह भोपाल का आखिरी हिस्सा हुआ करती थी, इसलिए यहां पायगा बनाया गया था। आबादी बढ़ती गई और अब यह शहर के बीचोंबीच आ गया है।

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