ब्रेकिंग
मुरैना में 'जहर' पर मेहरबानी: क्या मिलावटखोरों के 'कवच' बन गए हैं अधिकारी गुप्ता? मुरैना पुलिस की 'सेलेक्टिव होली': सच दिखाने वालों से दूरी, वाह-वाही करने वालों पर 'रंग' की बौछार! यूजीसी और आरक्षण को लेकर अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की दो दिवसीय राष्ट्रीय बैठक इंदौर में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी घोषित मंडला पुलिस की त्वरित कार्रवाई डकैती के पांच आरोपी जबलपुर से गिरफ्तार, रकम एवं उपयोग की गई कार बरामद भिंड के गोहद चौराहा थाना क्षेत्र के बिरखडी गांव के पास तेज़ रफ़्तार ट्रक ने ट्रेक्टर ट्रॉली में मारी... असम में राजधानी एक्सप्रेस से टकराकर 7 हाथियों की मौतः एक घायल; ट्रेन के 5 डिब्बे-इंजन पटरी से उतरे भिंड में रेत माफियाओं पर कार्रवाई के समय रेत माफियाओं ने एसडीएम की गाड़ी को मारी टक्कर बाल-बाल बचे। अधिकारियों की प्रताड़ना से तंग आकर पोस्ट मेन ने फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला की समाप्त ग्वालियर पुलिस लाइन के क्वार्टर में प्रधान आरक्षक ने की आत्महत्या, मचा हड़कंप
देश

यह सांठगांठ है: निजी अस्पतालों में मिले थे सरकारी डाक्टर नोटिस देकर भूले

 ग्वालियर। सरकारी डाक्टर अगर निजी अस्पताल में काम करते मिलें तो कोई बात नहीं! ग्वालियर के स्वास्थ्य विभाग में यही चलता है। निजी अस्पतालों में काम करते हुए यहां डाक्टर पकड़े गए। विभाग ने नोटिस दिए और कार्रवाई का दावा किया, लेकिन हुआ कुछ नहीं। ऐसे निजी अस्पतालों में बिना डाक्टर के पूरा काम चल रहा है, लेकिन कोई देखने वाला नहीं है। एक और खास बात यह कि पहले जिस अनुपात में निजी अस्पतालों में जांच पड़ताल होती थी वह अब नहीं हो रही है। इससे सीएमएचओ की भूमिका कटघरे में है।

इन अस्पतालों में पकड़े सरकारी डाक्टर

केस नंबर-1

हुजरात पुल के पास जनकगंज अस्पताल में महिला की मौत मामले में न्यायालय की सख्ती के बाद स्वास्थ्य विभाग ने पिछले महीने जनक अस्पताल में जांच दल भेजा था। जांच दल में डा़ सचिन श्रीवास्तव और बाबू सत्यवृत शर्मा शामिल थे। जांच के दौरान अस्पताल में भर्ती मरीजों के नोट्स पर सरकारी डाक्टरों के नाम मिले थे। स्वास्थ्य विभाग ने ना तो इन सरकारी डाक्टरों से यह जानने का प्रयास किया कि वह निजी अस्पतालों में मरीजों को देखने किस की इजाजत से पहुंचे और ना ही अस्पताल के खिलाफ कोई एक्शन लिया।

केस नंबर-2

महेश्वरी नर्सिंगहोम लक्ष्मीबाई कालोनी में पीसीपीएनडीटी की टीम ने 15 दिन पहले औचक निरीक्षण किया। टीम को अस्पताल में अल्ट्रासाउंड करते हुए कर्मचारी राज्य बीमा निगम के डा़ राजेश कुमार पिप्पल पकड़े मिले थे। स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल प्रबंधन को नोटिस देकर भूल गए और डा़ पिप्पल के खिलाफ कोई एक्शन भी नहीं लिया गया। महेश्वरी नर्सिंगहोम में जांच दल में डा़ आरके राजौरिया, बाबू संजय जोशी जांच करने पहुंचे थे।

इन अस्पतालों में ही में हुई मरीजों की मौत

हाल ही में लक्ष्मीबाई कालोनी स्थित कल्याण हास्पिटल में एक के बाद एक दो मरीजों की उपचार के दौरान मौत हुई। स्वजन ने लापरवाही का आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत तक दर्ज कराई थी। इसी तरह से चार दिन पहले आरएनएस हास्पिटल में मरीज की मौत को लेकर शव रखकर धरना प्रदर्शन हुआ। इस तरह की घटनाएं आए दिन हो रही है। स्वास्थ्य विभाग जांच के नाम पर खामियों को छिपाने का काम कर रहा है।

इनका कहना है-

जनकगंज और महेश्वरी अस्पताल में गड़बड़ी मिली थी, जिसको लेकर नोटिस भी जारी किया गया है। नोटिस का जवाब मिलते ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। दो अस्पताल में मरीज की मौत की जानकारी मिली है, लेकिन किसी ने शिकायत नहीं की। फिर भी जांच करेंगे।

Related Articles

Back to top button