हाईकोर्ट ने FIR रद्द करने और गिरफ्तारी पर रोक लगाने से किया इंकार

लखनऊ: ये तस्वीर वीसी विनय पाठक की है। कमीशनखोरी के आरोपों में घिरे छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय के कुलपति विनय पाठक की मुश्किलें बढ़ती जा रही है। विनय कुमार पाठक की गिरफ्तारी पर रोक लगाने और एफआईआर दर्ज करने के मामले में हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने विनय पाठक की याचिका को खारिज कर दिया है। यूपी एसटीएफ विनय पाठक को कभी भी गिरफ्तार कर सकती है।कुलपति के वकील एलपी मिश्र ने बीते चार नवंबर को पक्ष रखने के समय मांगा गया था। 9 नवंबर को हो विनय कुमार पाठक की तरफ से वकील अपना पक्ष रखा था। इस मामले में एसटीएफ अभी तक दो आरोपियों में अजय मिश्रा, अजय जैन को गिरफ्तार कर चुकी है।3 नवंबर को पिटीशन फाइल किया थालखनऊ के इंदिरा नगर थाने में निजी कंपनी के MD द्वारा तहरीर दिए जाने के बाद कुलपति समेत 1 अन्य पर नामजद FIR दर्ज हुई थी। इस बीच राहत पाने के मकसद से कुलपति ने हाईकोर्ट में तीन नवंबर को पिटीशन फाइल किया था। लखनऊ, कानपुर और आगरा समेत प्रदेश की तमाम बड़ी यूनिवर्सिटीज में यह मामला चर्चा के केंद्र में हैं।यह था पूरा मामलालखनऊ के इंदिरा नगर थाने में एफआईआर दर्ज करवाने वाले डिजिटेक्स टेक्नोलॉजीज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के एमडी डेविड एम. डेनिस ने आरोप लगाया कि उनकी कंपनी 2014 से एग्रीमेंट के तहत आगरा विश्वविद्यालय में प्री और पोस्ट एग्जाम का काम करती रही।विश्वविद्यालय के एग्जाम पेपर छापना, कॉपी को एग्जाम सेंटर से यूनिवर्सिटी तक पहुंचाने का पूरा काम इसी कंपनी के द्वारा किया जाता रहा है।साल 2019 में एग्रीमेंट खत्म हुआ तो डिजिटेक्स टेक्नोलॉजीज ने यूपीएलसी के जरिए आगरा विश्वविद्यालय का काम किया। इस बीच साल 2020 से 21 और 21- 22 में कंपनी के द्वारा किए गए काम का करोड़ों रुपया बिल बकाया हो गया था। तभी जनवरी 2022 में अंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा के कुलपति का चार्ज विनय पाठक को मिला तो उन्होंने बिल पास करने के एवज में कमीशन की मांग की।एफआईआर दर्ज कराने वाले डेविड डेनिस ने फरवरी 2022 में कानपुर स्थित विनय पाठक के सरकारी आवास पर मुलाकात की और जहां पर 15 फीसदी कमीशन की डिमांड रखी गई। कंपनी के मालिक ने 15 फीसदी कमीशन देने से मना किया तो आरोप है कि विनय पाठक ने धमकाया कि 8 विश्वविद्यालय के कुलपति मेरे बनाए हैं अगर कमीशन नहीं दिया तो किसी भी विश्वविद्यालय में काम नहीं कर पाओगे।आईफोन के फेस टाइम एप का जिक्रपुलिस को दी गई तहरीर में वादी डेविड एम. डेनिस ने लिखा हैं कि बिल पास करने के बदले कमीशन की रकम पहुंचाने के लिए कुलपति विनय पाठक ने अपने आईफोन से फेसटाइम में एप के जरिए लखनऊ के अजय मिश्रा से वीडियो कॉल पर बात करवाई और अजय मिश्रा का नंबर दिया। कानपुर विश्वविद्यालय कुलपति आवास पर हुई इस मुलाकात में डेनिश को यह भी कहां गया कि बात होने के कॉल डिलीट भी कर दें और बिल पास होते ही कमीशन की रकम अजय मिश्रा तक पहुंचा दें।आरोप है कि पहले बिल को पास करने की एवज में डेविड 30 लाख रुपये लेकर पहुंचा कमीशन के 3 लाख रुपये कम थे तो अजय मिश्रा ने उसे अपने घर में बंधक बना लिया और धमकी दी कि कमीशन की रकम नहीं मिली तो जाने नहीं देंगे। काफी मिन्नत करने के बाद उसे छोड़ा गया और अगले ही दिन डेविड ने बकाया के 3 लाख रुपये भी अजय मिश्रा को पहुंचा दिए थे।1 करोड़ 40 लाख की हुई वसूलीदूसरे बिल के 73 लाख रुपये का कमीशन कैश में देने पर डेविड ने असमर्थता जताई तो अजय मिश्रा ने राजस्थान के अलवर की इंटरनेशनल बिजनेस फॉर्म्स कंपनी के अलवर स्थित PNB के खाते में कमीशन के 63 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए और 10 लाख रुपये कैश लिए गए। विनय पाठक ने तीसरा बिल 1 सितंबर 2022 को 2 करोड़ 79 लाख का पास किया और जिसके एवज में 35 लाख 55 हजार रुपये का कमीशन बना। इस दौरान कुल 1 करोड़ 40 लाख रुपये का कमीशन वसूला गया।गौरतलब है कि कानपुर के छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय के कुलपति विनय पाठक को जनवरी 2022 में आगरा के डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय के कुलपति का अतिरिक्त प्रभार दिया गया था जो सितंबर महीने तक रहा। यह पूरा मामला इसी 9 महीने में अतिरिक्त कुलपति का चार्ज रहने के दौरान का बताया जा रहा हैं। इस बीच 1 अक्टूबर को प्रोफेसर आशु रानी को आगरा के अम्बेडकर यूनिवर्सिटी का कुलपति बनाया गया था।अब अंत में जान लीजिए कि यूपी के कौन से विश्वविद्यालयों की कमान रही विनय पाठक के हाथों में -AKTU के कुलपति – 4 अगस्त 2015 से 1 अगस्त 2021 तकभाषा विश्वविद्यालय लखनऊ का एडिशनल चार्ज – 22 दिसंबर 2020 से 10 अप्रैल 2021 तकआगरा विश्वविद्यालय का एडिशनल चार्ज – जनवरी 2022 से सितंबर 2022कानपुर विश्वविद्यालय कुलपति – 12 अप्रैल 2021 से अब तकAKTU में 6 साल रहे कुलपति4 अगस्त 2015 से 2 अगस्त 2021 तक विनय पाठक AKTU यानी डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी, लखनऊ के कुलपति रहे। इस दौरान भी विश्वविद्यालय कई अहम और बड़े कदम उठाएं ग।ए जिनको लेकर विवाद भी हुआ, पर उनका रुतबा इस कदर हावी रहा कि लगभग सभी मामलों में उन्हें क्लीन चिट मिलती गई। कई ऐसे मामले भी रहे जिनमें उन्हें राहत कोर्ट से मिली और उसके बाद अपना रसूख और मजबूत करने में कायम रहें। हालांकि यह पहला मौका हैं विनय पाठक पर तेजी से शिकंजा कसता हुआ नजर आ रहा हैं।आगरा, कानपुर से लेकर लखनऊ की यूनिवर्सिटीज STF के रडार मेंसबसे बड़ी बात यह है कि कुलपति विनय पाठक पर FIR दर्ज होते ही प्रदेश के करीब आधा दर्जन से ज्यादा विश्वविद्यालय सीधे तौर पर STF के रडार में आ चुकी हैं। FIR आगरा विश्वविद्यालय को लेकर हुई पर जांच में कानपुर विश्वविद्यालय और लखनऊ का AKTU भी शामिल हो गए। इस बीच भाषा विश्वविद्यालय से लेकर लखनऊ विश्वविद्यालय तक दूसरे नामजद आरोपी अमित मिश्रा की कंपनी के ठेके होने से इन पर भी जांच एजेंसी की नजर हैं।इस सभी विश्वविद्यालयों में कुलपति विनय पाठक की सीधा दखल होने की खबरें भी आती रही हैं। यह बात और हैं कि अब तक किसी भी मामले में उनकी ऐसी किरकिरी नही हुई थी।खबर यह भी है कि बुधवार को जांच एजेंसी के लोग AKTU पहुंचे। इस दौरान विश्वविद्यालय के कुलपति, कुलसचिव, वित्त अधिकारी से मिलकर प्रो. पाठक के टेन्योर या दखल के बाद हुई नियुक्तियों, योजनाओं, खरीद आदि की जानकारी जुटाई। जांच एजेंसी कुछ दस्तावेज भी अपने साथ ले गई है।2400 करोड़ की एफडी तुड़वाना भी बना चर्चा का केंद्रAKTU में कुलपति रहने के दौरान प्रोफेसर विनय कुमार पाठक पर विश्वविद्यालय की 2400 करोड़ की एफडी तुड़वाकर फंड का कही और इन्वेस्टमेंट करने का मामला एक बार फिर से चर्चा के केंद्र में हैं। जानकार बता रहे हैं कि STF इस पहलू की भी छानबीन करेगी कि कही ऐसा तो नहीं कि इसमें भी तमाम माध्यम से बड़ी कमाई की गई हो। इसके अलावा कॉलेजों के निर्माण पर आने वाले खर्च और ई-लाइब्रेरी को लेकर हुए खर्च का ब्योरा भी जांच एजेंसी इस मामले में शामिल कर सकती हैं।




