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दिवाली पर पूजा के लिए कितने हैं मुहूर्त, देखें आपके लिए कौन-सा रहेगा सही

इंदौर। हिंदू धर्म के प्रमुख पर्वों में दिवाली का प्रमुख स्थान है। इसे कार्तिक अमावस्या को मनाया जाता है। कार्तिक अमावस्या तिथि 12 नवंबर को दोपहर 2.12 बजे से अगले दिन 2.41 बजे तक रहेगी। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, दिवाली प्रदोष काल और महानिशीथ काल व्यापिनी अमावस्या में मनाई जाती है। इसमें प्रदोष काल का महत्व होता है। अमावस्या व्यापिनी महानिशीथ काल 12 नवंबर को है।

दिवाली में प्रदोषकाल का महत्व

ज्योतिष शास्त्र में दिवाली के पूजा में प्रदोषकाल महत्वपूर्ण होता है। प्रदोष काल मानक समय शाम 5.11 बजे से 6.23 बजे तक रहेगा। लक्ष्मी-गणेश पूजा एवं खाता पूजन के लिए शुभ मुहूर्त शाम 5.27 से 7.23 के बीच वृष लग्न में शुभ होगा। इसके अलावा शाम 6.41 से लेकर 8.58 तक वृश्चिक लग्न, दोपहर 12.51 से 2.22 तक कुंभ लग्न और रात में 11.55 से 2.09 तक सिह लग्न विद्यमान रहेगा।

दिवाली के दिन करें दीपदान

दिवाली सिद्ध मुहूर्त होता है। इस दिन विशेष कार्य को किया जाए तो उसमें सफलता मिलती है। इस दिन शाम को मंदिरों, कूप, बावड़ी और गोाशाला में दीपदान करना चाहिए। व्यापारी वर्ग को इस दिन अपने प्रतिष्ठान की सफलता के लिए कुबेर-लक्ष्मी का पूजन करना चाहिए। धूप दीप प्रज्जवलित कर श्रीसूक्तम, कनकधारा, लक्ष्मी चालीसा समेत किसी भी लक्ष्मी मंत्र का जप करना चाहिए।

डिसक्लेमर

‘इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।’

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