ब्रेकिंग
जनपद कार्यालय बना अखाड़ा! सीईओ ने तीन जनपद सदस्यों पर धमकी और अभद्रता का कराया मामला दर्ज दिल्ली के होटल में भीषण आग, 21 मौतों की खबर से हड़कंप प्यासी मुरैना और पानी में मस्ती! समर वेव वॉटर पार्क पर उठने लगे सवाल मुरैना सगाई पक्की होते ही दूल्हे पर हमला लड़की देखकर लौट रहे युवक को घेरकर बदमाशों ने पीटा, चेन-अंगू... बामौर थाना : तेज रफ्तार ट्रैक्टर ने बुजुर्ग को मारी टक्कर दिमनी थाना : जहरीला पदार्थ खाने से वृद्ध की मौत, जांच शुरू पोरसा थाना : कट्टा लेकर घूम रहे युवक को पुलिस ने दबोचा सगाई की खुशियों के बीच करोड़ों की चोरी से सनसनी बीजेपी नेता के भाई के घर दिनदहाड़े वारदात सरकारी जमीन विवाद में खूनी संघर्ष, फायरिंग में युवक की मौत, दो महिलाएं घायल मुरैना: सबलगढ़ के गुरैमा गांव में भीषण आग, ग्रामीणों की तत्परता से टला बड़ा हादसा
उत्तरप्रदेश

गौतम नगर में मुलभूत सुविधाओं का अभाव, पीने के पानी के लिए लोगों को करना पड़ रहा संघर्ष

चंदौली: चंदौली जिले के सदर नगर पंचायत में चुनाव की तैयारियों को लेकर संभावित प्रत्याशियों ने जनसंपर्क तेज कर दिया। हालांकि चुनावी सरगर्मी बढ़ने के सा‌थ लोग जमीनी मुद्दों को उनके सामने रखने से नहीं चूक रहे है। सदर नगर पंचायत के गौतम नगर में पानी की निकासी, सीसीरोड और पेयजल की समस्या सबसे बड़ा मुद्दा है। परन्तु सभी लोग इसी मुद्दे को हल करने का दावा कर रहे है। ऐसे में चुनावी मैदान में आने के बाद ही लोगों को असली नकली का परख समझ में आएगा।वार्ड के लोग जानकारी देते हुए।चेयरमैन की उपेक्षा का आरोपआपको बता दें कि चंदौली सदर नगर पंचायत हमेशा जिले के चुनावी मुद्दे का केंद्र रहा है। ऐसे में नगर पंचायत का गौतम नगर मुलभूत सूविधाओं से वंचित होने के पीछे लोग जनप्रतिनिधियों और चेयरमैन पर उपेक्षा का आरोप लगा रहे है। गौतम नगर के अजीत सोनी के बताया कि वार्ड के लोग पेयजल की समस्याओं के साथ जूझ रहे है। हालांकि कई घरों में बोरिंग होने के चलते उन्हें पीने का पानी उपलबध है। परन्तु कई घरों के लोगों को दूर से आपूर्ति के पानी पर ही निर्भर होना पड़ रहा है।सभासद पर कार्य न कराने का आरोपगौतम नगर की प्रियंका कुमारी ने बताया कि सभासद के द्वारा कोई कार्य नहीं कराया गया है। चुनाव जीतने के पांच साल तक सभासद नगर पंचायत और चेयरमैन के कार्यालय का चक्कर लगाते देखे गए। ऐसे लोग जनता का वोट लेने के बाद भी अफसरों और मजबूत जनप्रतिनिधियों का पिछलग्गू बनकर रह जाते है। जबकि वोट देने वाले लोग पांच साल तक बुनियादी समस्याओं को लेकर जूझते रहते है।

Related Articles

Back to top button