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छत्तीसगढ़

बिलासपुर में 31 साल से बंगाली समाज में चल रही परंपरा, दिवाली की रात हुई मां काली की आराधना

बिलासपुर: दीपों से जगमग हुआ मंदिर।कार्तिक अमावस्या की मध्य रात्रि महानिशीथ काल में बिलासपुर के रेलवे परिक्षेत्र में बंगाली समाज के लोगों ने काली मां की विशेष पूजा आराधना की। इस दौरान न्यू लोको कॉलोनी स्थित काली मंदिर में 2100 दीप सजाए गए। यहां मंगलवार की देर रात तक अनुष्ठान कर पूजा-अर्चना की गई। दिवाली पर्व पर शहर में बंगाली समाज के लोगों की काली पूजा करने की परंपरा 31 पुरानी है।काली मां की हुई विशेष पूजा आराधना।काली पूजा कार्तिक मास में खास तौर पर बंगाल, उड़ीसा एवं असम में मनाया जाता है। यह पूजा कार्तिक मास की अमावस्या के दिन की जाती है। काली पूजा को श्यामा पूजा भी कहते हैं। बंगाली परंपरा के अनुसार दिवाली को काली पूजा भी कहा जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार इस दिन मां काली 64,000 योगिनियों के साथ प्रकट हुई थीं और रक्तबीज जैसे राक्षसों और दुष्टों का संहार किया था। ऐसा माना जाता है कि आधी रात को मां काली की विधिवत पूजा करने से मनुष्य के जीवन की सारी दुख और पीड़ाएं शांत हो जाती है। मां काली की पूजा करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है।पूजा अर्चना करने से पहले दीप सजातीं महिलाएं।2100 दीप सजाकर की गई काली मां की आराधनारेलवे परिक्षेत्र के न्यू लोको कॉलोनी में काली मां का मंदिर है, जहां हर साल नवरात्र पर्व पर पूरे 9 दिनों तक विशेष पूजा आराधना की जाती है और ज्योति कलश प्रज्जवलित किया जाता है। वहीं, दिवाली पर्व पर अमावस्या की रात देवी मंदिर में विधि विधान से मां काली की पूजा अर्चना कर अनुष्ठान किया जाता है। मंगलवार की रात यहां श्रद्धालुओं ने 2100 दीप सजाकर मां काली की पूजा की। यहां देर रात तक श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी रही।

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