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हरियाणा

एक ही परिवार के चार सदस्यों समेत सभी छह घायलों ने दम तोड़ा

गुरुग्राम: नखड़ोला पटाखा फैक्ट्री में ब्लास्ट के बाद रेस्क्यू करते लोग12 अक्टूबर की दोपहर को हुआ था हादसा, शुक्रवार सुबह दो लोगों ने तोड़ा दमखेड़कीदौला थाना क्षेत्र के गांव नखड़ौला के एक मकान में बने पटाखों में हुए ब्लास्ट में झुलसे सभी छह लोगों की मौत हो गई। इनमें से चार एक ही परिवार के हैं। सफदरजंग अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रहे तनुज और विष्णुकांत ने भी शुक्रवार सुबह दम तोड़ दिया। जबकि, इनसे पहले मकान मालिक भगवान दास, मनीष, छवि और सतीश कुमार की मौत हो चुकी है। गांव नखड़ौला स्थित मकान में भगवान दास घर में ही पटाखे बनाने का काम करते थे। वे गत सप्ताह बुधवार की दोपहर अपने दो बेटे, बेटी, रिश्तेदार और जानकार के साथ बैठे हुए थे। उसी दौरान मकान में रखे पटाखों में अचानक आग लग गई। आग लगते ही किचन में रखे तीन सिलेंडरों में से एक फट गया। धमाका इतना जबरदस्त था कि मकान के तीन कमरों की छत भरभरा कर गिर गई। इस हादसे में 50 वर्षीय भगवान दास के अलावा उनके बेटे मनीष (20 वर्ष), तनुज (10 वर्ष), बेटी छवि (12 वर्ष), रिश्तेदार सतीश कुमार (40 वर्ष) और एक अन्य जानकार विष्णुकांत झुलस गए थे। जबकि मलबे के नीचे दबने से उन्हें काफी चोट भी लगी। हादसे में अब सभी छह लोगों की मौत हो गई। पुलिस ने भगवान दास के विरुद्ध खेडक़ीदौला थाना पुलिस ने अवैध रूप से पटाखे रखने और बनाने के आरोप में मामला दर्ज किया था।इधर, इस हादसे को देखते हुए प्रशासन ने पटाखा गोदामों पर लगातार छापेमारी कर रही है। अब तक तीन पटाखा गोदाम सील किए जा चुके हैं। पत्नी व बेटी सुरक्षितइस हादसे में सभी लोग 60 प्रतिशत से अधिक झुलस गए थे। भगवान दास और सतीश कुमार तो 90 प्रतिशत से अधिक झुलस गए थे। मलबे में दबने से सभी को चोट भी आई थी। इस वजह से सभी ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। हादसे के दौरान भगवान दास की पत्नी भागीरथी और उनकी बड़ी बेटी 19 वर्षीय मुस्कान मकान के किचन में थी। आग लगने से धुआं इतना हुआ कि वे बाहर नहीं निकल सकीं। इस वजह से दोनों का बचाव हो गया।ऐसे हुआ था हादसागत 12 अक्टूबर की दोपहर 40 वर्षीय भगवान दास अपने बेटे 20 वर्षीय मनीष, 10 वर्षीय तनुज, 12 वर्षीय बेटी छवि, रिश्तेदार 40 वर्षीय सतीश कुमार और 35 वर्षीय विष्णुकांत के साथ मकान में बैठे थे। मकान के एक कमरे में पटाखे रखे हुए थे। पटाखों में अचानक आग लग गई थी। आग लगने के साथ ही किचन में रखे तीन सिलेंडरों में से एक फट गया। इससे मकान के तीन कमरों की छत भरभराकर गिर गई थी।

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