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‘सच्ची खुशी तब होगी जब लोग इसकी सराहना करेंगे’, बेटे द्वारा बनाई रामलला की मूर्ति के चयन पर बोली मां

कर्नाटक में मैसुरु के अरुण योगीराज का परिवार खुशी से झूम रहा है क्योंकि अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट ने उनके द्वारा बनाई गए ‘रामलला’ की मूर्ति को राम मंदिर में स्थापना के लिए चुना है। मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने सोमवार को अयोध्या में घोषणा की थी कि नई मूर्ति में भगवान राम को पांच साल के बच्चे के रूप में खड़ी मुद्रा में दर्शाया गया है और कहा कि इसे 18 जनवरी को ‘गर्भगृह’ में ‘आसन’ पर रखा जाएगा।

हमारा पूरा परिवार प्रसन्न है
योगीराज की माता सरस्वती ने संवाददाताओं से कहा कि यह बहुत ही हर्ष की बात है कि उनके बेटे द्वारा निर्मित मूर्ति का चयन किया गया है। उन्होंने कहा,”जब से हमें यह खबर मिली है कि अरुण द्वारा बनाई गई मूर्ति का चयन (स्थापना के लिए) किया गया है, हम बहुत खुश हैं। हमारा पूरा परिवार प्रसन्न है।” योगीराज ने ही केदारनाथ में स्थापित आदि शंकराचार्य की मूर्ति और दिल्ली में इंडिया गेट के पास स्थापित की गई सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा बनाई है।

सच्ची खुशी तब होगी जब लोग इसकी सराहना करेंगे
योगीराज ने रामलला की नई मूर्ति बनाने में आई चुनौतियों के बारे में कहा, ‘‘मूर्ति एक बच्चे की बनानी थी, जो दिव्य हो, क्योंकि यह भगवान के अवतार की मूर्ति है। जो भी कोई मूर्ति को देखें उसे दिव्यता का एहसास होना चाहिए।” प्रख्यात मूर्तिकार ने कहा,”बच्चे जैसे चेहरे के साथ-साथ दिव्य पहलू को ध्यान में रखते हुए मैंने लगभग छह से सात महीने पहले अपना काम शुरू किया था। मूर्ति के चयन से ज्यादा मेरे लिए यह महत्वपूर्ण है कि ये लोगों को पसंद आनी चाहिए। सच्ची खुशी मुझे तब होगी जब लोग इसकी सराहना करेंगे।”

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