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मुरैना में सरपंचों की कार्यशैली पर उठे सवाल: विकास के नाम पर फाइलों में दौड़ रहा भ्रष्टाचार
मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में पंचायती राज व्यवस्था भ्रष्टाचार और मनमानी का अखाड़ा बनती जा रही है। जिले की तमाम ग्राम पंचायतों में सरपंचों और सचिवों की कथित मिलीभगत से विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हो रहा है, जिससे आम ग्रामीण ठगा सा महसूस कर रहा है। ग्रामीण इलाकों में स्थिति यह है कि कागजों पर करोड़ों रुपये की लागत से सीसी रोड, नाली निर्माण और जल जीवन मिशन के तहत नल-जल योजनाएं पूरी दिखाई जा रही हैं, जबकि ज़मीनी हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत है। कई गांवों में निर्माण कार्य या तो आधे-अधूरे पड़े हैं या घटिया सामग्री के इस्तेमाल के कारण कुछ ही महीनों में उखड़ने लगे हैं। अंबाह, पोरसा, कैलारस और जौरा जैसे ब्लॉकों से अक्सर ऐसी शिकायतें सामने आती हैं कि बिना कोई काम किए ही फर्जी मूल्यांकन और मस्टर रोल के जरिए सरकारी खजाने की राशि निकाली जा रही है। जिला प्रशासन और जनपद स्तर पर बार-बार शिकायतें दर्ज कराने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता से इन जनप्रतिनिधियों के हौसले बुलंद हैं। ग्रामीण अब आरटीआई और उच्च स्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं ताकि जनता के टैक्स के पैसों का हिसाब लिया जा सके। यदि समय रहते इन मामलों में कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो ग्रामीण सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे।


