मुख्य समाचार
मुरैना की सियासत: कांग्रेस के टिकट पर जीता महापौर, बीजेपी में जाने के बाद विकास पर उठे सवाल!
मुरैना नगर निगम चुनाव के चार साल और महापौर शारदा सोलंकी के दलबदल को दो साल पूरे होने के बाद, शहर की जनता अब नेताओं से कड़े सवाल पूछ रही है। 20 जुलाई 2022 को कांग्रेस के टिकट पर जीत दर्ज करने वाली महापौर ने जनता के सामने 'वचन पत्र' रखकर शहर को स्वच्छ, सुंदर और सुविधाओं से लैस बनाने के बड़े-बड़े दावे किए थे। लेकिन, 30 अप्रैल 2024 को बीजेपी का दामन थामने के बाद विकास की गाड़ी पटरी से उतरती नजर आ रही है। वादों का क्या हुआ: कांग्रेस के वचन पत्र में सीवर लाइन, पेयजल, और पक्की सड़कों के जो वादे किए गए थे, वे आज भी फाइलों और कागजों तक ही सीमित हैं। सफाई और सुंदरता: शहर में जगह-जगह लगे कचरे के ढेर और बदहाल नालियां इस बात की गवाही दे रहे हैं कि मुरैना को स्वच्छ और सुंदर बनाने के दावे सिर्फ जुमला साबित हुए। सुविधाओं का सच: जनता को जिन आधुनिक सुविधाओं और बुनियादी विकास का सपना दिखाया गया था, धरातल पर उसका अता-पता नहीं है। जिम्मेदारी किसकी: पार्टी बदलने से जनता से किए गए वादे नहीं बदलते। ऐसे में, अधूरे विकास कार्यों की नैतिक जिम्मेदारी आखिर किसकी है—महापौर की या सत्ता परिवर्तन की सियासत की? अब मुरैना की जनता रील और भाषणों से नहीं, बल्कि विकास के धरातल पर हिसाब मांग रही है।


