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मध्यप्रदेश

देश प्रेम ऐसा कि दाम दोगुना हुए फिर भी खूब हुई तिरंगे की खरीदी

भोपाल। देश प्रेम ऐसा कि दाम दोगुना हो गए, तब भी तिरंगे की गणतंत्र दिवस के एक दिन पूर्व सोमवार शाम तक खूब बिक्री हुई। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जागी देश भक्ति की भावना और हर घर तिरंगा अभियान के बाद अचानक से तिरंगे की बिक्री बढ़ी थी। थोक व्यापारियों को भी मांग पूरी करने के लिए मशक्कत करनी पड़ी। बता दें कि हर घर तिरंगा अभियान पिछले साल शुरू किया गया था, इस वर्ष इस अभियान का व्यापक असर दिखाई दे रहा है।

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा अपने रेडियो कार्यक्रम ”मन की बात” में लोगों से इस साल भी 15 अगस्त को अपने घरों पर राष्ट्रीय तिरंगा फहराने का आह्वान किया था। इसके बाद राष्ट्रीय ध्वज की कीमत 25 प्रतिशत तक बढ़ गई है।पिछले साल यह 30-40 रुपये प्रति नग था लेकिन अब यह 60 रुपए तक में मिल रहा है। शीला ग्रुप, मालवीय नगर के संचालक अजय अग्रवाल ने बताया कि उन्हें पिछले कुछ दिनों में मध्य प्रदेश समेत देश भर से लगभग 25 लाख झंडों की आपूर्ति के आर्डर मिले हैं, जबकि हम केवल दस लाख आर्डर ही पूरा कर पाए हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें आनलाइन आर्डर भी प्राप्त हुए हैं। हम आर्डर पूरा करने के लिए रेलवे, ट्रक और कूरियर सेवाओं का उपयोग कर रहे हैं। एमएलए रेस्ट हाउस के पास स्थित झलक इंटरप्राइजेज के संचालक नितेश अग्रवाल के मुताबिक आपूर्ति कम होने के कारण उन्होंने नए आर्डर लेना बंद कर दिया है।जब हमारे पास स्टाक नहीं है तो हम ग्राहकों से आर्डर कैसे ले सकते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति सरकार द्वारा अभियान को देर से बढ़ावा देने के कारण हो रही है।उन्हें ज्यादातर बैतूल, सीहोर, शुजालपुर समेत अन्य जिलों के जिला पंचायत और नगर निकायों जैसे सरकारी कार्यालयों से आर्डर मिल रहे हैं। हालांकि, नितेश ने कहा कि झंडे की मांग पिछले साल की तुलना में कम है। हम आर्डर नहीं ले रहे हैं, क्योंकि हम आपूर्ति को लेकर आश्वस्त नहीं हैं।वहीं अग्रवाल ब्रदर्स के मालिक हरि प्रकाश ने बताया कि हमें खुरई, सतना, दमोह और होशंगाबाद सहित पूरे मध्य प्रदेश से आर्डर मिल रहे हैं।स्वतंत्रता दिवस नजदीक आने से मांग इतनी बढ़ गई है कि हम आपूर्ति नहीं कर पा रहे हैं।

अब पालिस्टर से भी बनने लगे है झंडे

झंडा व्यवसायी अजय अग्रवाल के मुताबिक, तिरंगा प्रिंट वाले कपड़े का उत्पादन अहमदाबाद, हैदराबाद और सूरत की मिलों में होता है। इन कपड़ों की थान को भोपाल लाया जाता है और स्थानीय स्तर पर काटा और सिला जाता है।पहले, राष्ट्रीय ध्वज बनाने के लिए केवल हाथ से बुने हुए रेशम, सूती और खादी के कपड़ों का उपयोग किया जा सकता था, लेकिन पिछले साल केंद्र सरकार ने भारतीय ध्वज संहिता में संशोधन किया, जिससे तिरंगे को बनाने के लिए पालिस्टर (रोटो) कपड़े के उपयोग की अनुमति मिल गई। अजय ने बताया कि इस बदलाव ने झंडों को किफायती बना दिया है।

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