पहले अपनों ने घरों से निकाला अब आंधी उड़ा ले गई बसेरा
भोपालनव। अपनों ने घरों व दिलों से पहले से निकाल दिया था। दुखों का घूंट पीकर वृद्धाश्रम में रह रहे थे। जैसे-जैसे गैरों से पहचान हुई। उन्हें अपना बनाया तो खुशियां लौटीं। खुशी-खुशी आश्रम में रह रहे थे, लेकिन शुक्रवार की आंधी-पानी ने बेघर कर दिया। इतनी तेज आंधी आई, उसमें आश्रम में लगीं टीन की चादरें उड़ गईं। वर्षा का पानी भर गया। बिस्तर गीले हो गए। सामान भींग गया। गनीमत रही कि किसी को चोट नहीं आई। अब मदद के लिए हां जाएं?चार इमली ज्योतिबा फुले नगर नंदन वन पार्क के पास आश्रम की संचालिका संगीता नेलोर जो पहले से निश्शुल्क मानव सेवा करके हमें रख रही हैं, अब वो भी वेचारी कितनी हमारी मदद करें। दो दिन से सो नहीं पा रहे हैं। वर्षा का पानी पैरों व हाथों से बाहर निकालते-निकालते रात काटनी पड़ रही है। इतना कहते-कहते 70 वर्ष के बुजुर्ग दयाशंकर और 75 वर्ष के गयादीन की आंखों में पानी आ गया। बेघर हुए बुजुर्गों ने इंटरनेट मीडिया पर आश्रम को दुरुस्त कराने के लिए शासन-प्रशासन से गुहार लगाई है, लेकिन अब तक कोई मदद के लिए आगे नहीं आया है।
2009 से संचालित है वृद्धाश्रम
वृद्धाश्रम की संचालिका संगीता नेलोर ने बताया कि वर्ष-2009 से वृद्धाश्रम का संचालन कर रही हूं। नेलोर शिक्षा समिति को शासकीय मान्यता प्राप्त आश्रम हैं, लेकिन खुद ही निश्शुल्क आश्रम का संचालन कर रही हूं। दो मंजिला आश्रम की दूसरी मंजिल पर टीन की चादर लगाई थीं। बजट नहीं होने से छत नहीं डाल पाई। आंधी से चादर उड़ गईं। वर्षा का पानी भर गया। इससे बुजुर्गों का सामान गीला हो गया। आश्रम में अभी 14 महिलाएं हैं, जो नीचे रह रही हैं। बाकी आठ पुरुष हैं, जो टीन शेड में रहते हैं। आंधी से पुरुष बुजुर्ग बेघर हो गए हैं। इनकी पीड़ा देकर इंटरनेट मीडिया पर वीडियो वायरल करके मदद की गुहार लगाई है। यदि शासन-प्रशासन या किसी समाजसेवी, व्यवसायी की ओर से मदद मिलती है तो आश्रम में दुरुस्त करा कर बुजुर्गों को रहने की फिर से व्यवस्था की जा सकेगी।




