ब्रेकिंग
मुरैना में 'जहर' पर मेहरबानी: क्या मिलावटखोरों के 'कवच' बन गए हैं अधिकारी गुप्ता? मुरैना पुलिस की 'सेलेक्टिव होली': सच दिखाने वालों से दूरी, वाह-वाही करने वालों पर 'रंग' की बौछार! यूजीसी और आरक्षण को लेकर अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की दो दिवसीय राष्ट्रीय बैठक इंदौर में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी घोषित मंडला पुलिस की त्वरित कार्रवाई डकैती के पांच आरोपी जबलपुर से गिरफ्तार, रकम एवं उपयोग की गई कार बरामद भिंड के गोहद चौराहा थाना क्षेत्र के बिरखडी गांव के पास तेज़ रफ़्तार ट्रक ने ट्रेक्टर ट्रॉली में मारी... असम में राजधानी एक्सप्रेस से टकराकर 7 हाथियों की मौतः एक घायल; ट्रेन के 5 डिब्बे-इंजन पटरी से उतरे भिंड में रेत माफियाओं पर कार्रवाई के समय रेत माफियाओं ने एसडीएम की गाड़ी को मारी टक्कर बाल-बाल बचे। अधिकारियों की प्रताड़ना से तंग आकर पोस्ट मेन ने फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला की समाप्त ग्वालियर पुलिस लाइन के क्वार्टर में प्रधान आरक्षक ने की आत्महत्या, मचा हड़कंप
दिल्ली NCR

इतिहास में ऐसा तीसरा, 4 साल में दूसरा मौका; 2 जजों ने 32 केस सुने

नई दिल्ली: जस्टिस हिमा कोहली (बाएं) और जस्टिस बेला एम. त्रिवेदी (दाएं)।अमूमन सुप्रीम कोर्ट में महिला जजों की अलग बेंच नहीं बनती। लेकिन गुरुवार को सिर्फ महिला जजों की बेंच बनी। जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस बेला एम. त्रिवेदी की बेंच कोर्ट नंबर 11 में बैठी। बेंच ने 32 मामलों में सुनवाई की। इनमें 10 वैवाहिक विवाद के थे। 11 जमानत से जुड़ी ट्रांसफर याचिकाओं और अन्य 11 अलग-अलग विवादों से जुड़े थे।सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील आदिश चंद्र अग्रवाला ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में यह तीसरा मौका था। पहली बार साल 2013 में जस्टिस ज्ञान सुधा मिश्रा और जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की बेंच बनाई गई थी। दूसरा मौका साल 2018 में आया। तब जस्टिस आर. भानुमति और जस्टिस इंदिरा बनर्जी की बेंच गठित की गई थी।सुप्रीम कोर्ट में महिला जजसुप्रीम कोर्ट में 3 महिला जज हैं। जस्टिस हिमा कोहली, जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस बेला एम. त्रिवेदी। जस्टिस नागरत्ना 2027 में पहली महिला सीजेआई बन सकती हैं।1989 में जस्टिस एम. फातिमा बीवी के रूप में सुप्रीम कोर्ट को पहली महिला जज मिली थी।सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में अब तक 10 महिलाएं जज रह चुकी हैं।सुप्रीम कोर्ट में एक दिन में अधिकतम 3 महिला वकीलों ने दलीलें पेश की हैं। ऐसा 33 बार हो चुका है।इंसाफ की कुर्सी पर क्या महिला और क्या पुरुष… भेद न ही हो तो बेहतरपहली बेंच का हिस्सा रहीं जस्टिस रंजना देसाई ने कहा- सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में पहली संपूर्ण महिला पीठ की सदस्य होने के तौर पर मेरा नाम जुड़ा है। मेरे साथ दूसरी सदस्य जस्टिस ज्ञान सुधा मिश्रा थीं। हालांकि मेरा निजी मत है कि ऐसा भेद न ही हो तो बेहतर। इंसाफ की कुर्सी पर क्या महिला और क्या पुरुष। महिलाएं भी तो उतनी ही बुरी या उतनी अच्छी हो सकती हैं, जितने बुरे या अच्छे पुरुष हो सकते हैं। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कुर्सी पर महिला थीं या पुरुष। न्यायाधीश चुने जाने का आधार या मानक पुरुष या महिला नहीं होता। चयन और नियुक्ति मेरिट के आधार पर ही होती है।

Related Articles

Back to top button