मंडीदीप। औबेदुल्लागंज वन मंडल में एक बार फिर दो बाघों के बीच हुए संघर्ष में एक वयस्क बाघ की मौत से मंडल के जिम्मेदारों की सांसें फूल गईं। प्राप्त जानकारी के अनुसार शुक्रवार-शनिवार की दरमियानी रात वन विभाग के अधिकारियों को सूचना मिली कि गौहरगंज रेंज की पांजरा बीट में एक खेत के पास बाघ का शव पड़ा है। सूचना के बाद मैदानी अमला तुरंत हरकत में आया और कर्मचारियों को मौके पर रवाना किया गया। शनिवार को विभागीय अधिकारी भी घटना स्थल पर पहुंचे। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व एवं वन विहार के चिकित्सकों के दल ने बाघ के शव का […]
मंडीदीप। औबेदुल्लागंज वन मंडल में एक बार फिर दो बाघों के बीच हुए संघर्ष में एक वयस्क बाघ की मौत से मंडल के जिम्मेदारों की सांसें फूल गईं। प्राप्त जानकारी के अनुसार शुक्रवार-शनिवार की दरमियानी रात वन विभाग के अधिकारियों को सूचना मिली कि गौहरगंज रेंज की पांजरा बीट में एक खेत के पास बाघ का शव पड़ा है। सूचना के बाद मैदानी अमला तुरंत हरकत में आया और कर्मचारियों को मौके पर रवाना किया गया। शनिवार को विभागीय अधिकारी भी घटना स्थल पर पहुंचे। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व एवं वन विहार के चिकित्सकों के दल ने बाघ के शव का पोस्टमार्टम किया। वन अधिकारियों की उपस्थिति में बाघ के शव का अंतिम संस्कार किया गया।
बाघ के शरीर पर जगह-जगह जख्म
बताया जा रहा है की मृत बाघ के शरीर पर पंजे और दांत के गहरे घाव थे। वहीं ढाई-तीन वर्षीय नर बाघ की रीढ़ की हड्डी भी टूटी पाई गई। आशंका जताई जा रही है कि किसी अन्य बाघ के साथ टेरिटोरियल फाइट की वजह से बाघ की जान गई है। इस बारे में मंडल अधीक्षक पुष्पेंद्र सिंह धाकड़ ने बताया कि मृत बाघ के शरीर पर कई जगह दांत और पंजों के घाव मिले हैं। इससे लगता है कि बाघ की मौत आपसी फाइट के चलते हुई है। उल्लेखनीय है की एक साल में बाघों के संघर्ष की यह चौथी घटना है। विशेषज्ञों के अनुसार बाघों के बीच संघर्ष के मुख्य कारण है इनकी संख्या का बढ़ना, जबकि टेरीटोरियल एरिया में कमी हो रही है। इस वजह से बाघों के बीच आपसी संघर्ष की घटनाएं सामने आ रही हैं।
इनका कहना है
बाघ के पेट, गर्दन और पिछले हिस्से पर दांत और पंजों के गहरे घाव मिले हैं। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि दो बाघों के बीच फाइट हुई थी, जिसमें ढाई से तीन वर्ष के नर बाघ की मौत हो गई।