‘आप चाहे तो मेरा फोन ले सकते हो, मैं डरता नहीं हूं’, विपक्षी नेताओं की फोन टैपिंग पर राहुल गांधी ने केंद्र को घेरा
विपक्ष के कई नेताओं के आईफोन पर Apple कंपनी की तरफ से अलर्ट भेजा गया है। विपक्ष के नेता अब मोदी सरकार पर फोन टैपिंग और जासूसी के आरोप लगा रहे हैं। इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने कहा कि, ‘आप जितनी चाहें उतनी (फोन) टैपिंग करा सकते हैं। अगर आपको मेरा फोन चाहिए तो मैं खुद आपको दे दूंगा। कम लोग इसके खिलाफ लड़ रहे हैं। हम डरने वाले लोग नहीं हैं, लड़ने वाले लोग हैं। हम पीछे नहीं हटेंगे।’
राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में मोदी सरकार को घेरते हुए कहा कि, विपक्ष के नेताओं की आवाज दबाने के लिए उनकी जासूसी कराई जा रही है। राहुल गांधी ने कहा, ‘पहले मैं सोचता था कि नंबर 1 पीएम मोदी हैं, नंबर 2 अडानी हैं और नंबर 3 अमित शाह हैं, लेकिन यह गलत है। नंबर 1 हैं अडानी, नंबर 2 हैं पीएम मोदी और नंबर 3 हैं अमित शाह। हम भारत की राजनीति को समझ चुके हैं और अब अडानी जी बच नहीं सकते। ध्यान भटकाने वाली राजनीति चल रही है।
अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कई विपक्षी नेताओं को उनके फोन निर्माता से प्राप्त चेतावनी ई-मेल की एक प्रति दिखाई, जिसमें कहा गया था कि “राज्य प्रायोजित हमलावर उनके फोन से छेड़छाड़ करने की कोशिश कर रहे हैं। विपक्ष के कई नेताओं ने दावा किया है कि उनके मोबाइल पर फोन निर्माताओं द्वारा एक संदेश भेजा गया है, जिसमें कहा गया कि उनके फोन में सरकार समर्थित हैकरों द्वारा हैकिंग की कोशिश की गई है। जिन नेताओं ने यह शिकायत की है, उनमें तृणमूल कांग्रेस की महुआ मोइत्रा, शिवसेना (उद्धव गुट) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी, कांग्रेस नेता शशि थरूर और पवन खेड़ा शामिल हैं। इसके अलावा आप सांसद राघव चड्ढा ने कहा कि उन्हें भी इस तरह के मैसेज आए हैं।
विपक्ष को ही क्यों मिला अलर्ट- प्रियंका चतुर्वेदी
शिवसेना (उद्धव गुट) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि एपल का मैसेज सिर्फ विपक्ष के सांसदों को ही क्यों आया है? बीजेपी के किसी सांसद को क्यों नहीं आया है? और अगर आया है तो उन्हें बताना चाहिए। उनका कहना है कि मैं 20 सालों से एप्पल फोन का इस्तेमाल कर रही हूं। ये पहला मौका है कि इस तरह का मैसेज एप्पल ने भेजा है। ये अलर्ट एपल की ओर से आया है, विपक्ष के किसी नेता की ओर से नही। ये बेहद गंभीर मामला है। पेगासस का मामला हमारे सामने है कि विपक्ष की ओर से लगातार मांग करने के बावजूद सरकार ने आज तक इस मुद्दे पर संसद में चर्चा नहीं की।




