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मध्यप्रदेश

ऐसा केयर सेंटर, जहां श्वानों का रोजाना होता है बाडी स्पा, हरदम रहती है कैमरे की नजर

भोपाल। पिछले दिनों एक श्वान प्रशिक्षक द्वारा ही एक पालतू श्वान की हत्या के बाद उसका वीडियो जारी होने से शहर के श्वान प्रेमियों में जहां आक्रोश है, वहीं वे अपने पालतू श्वान को वे लेकर डरे भी हुए हैं। ऐसे समय में लोग क्षण भर के लिए अपने कुत्ते को अकेला छोड़ना पंसद नहीं कर रहे हैं, लेकिन समस्या तब जटिल हो जाती है, जबकि परिवार को कहीं बाहर जाना होता है। वे अपने श्वान को साथ लेकर जा सकते नहीं, वहीं घर पर उसकी देखभाल करने वाला कोई नहीं है।ऐसे समय में शहर में संचालित डाग बोर्डिंग सेंटर पर भरोसा किया जा सकता है। राजधानी के विभिन्न क्षेत्रों में ऐसे करीब एक दर्जन सेंटर संचालित हैं, जहां श्वान को फाइव स्टार होटल जैसी सुविधाएं मिलती हैं। यहां हम डाग बोर्डिंग सेंटर और मिलने वाली सुविधाओं के बारे में बता रहे हैं।

कोरोना काल में हुई शुरुआत

गेहूंखेड़ा स्थित पव्स – द डाग प्लेनेट के संचालक सागर जिंदल बातते हैं कि वर्ष 2019 में जब पूरा देश कोरोना के संकट से जूझ रहा था, लोग अपने नगरीय आवास छोड़कर अपने गांवों की ओर पलायन कर रहे थे, तब पालतू जानवरों की चिंता करने वाला भी कोई नहीं था। उस दौरान मैं खुद पढ़ाई करने लंदन गया ही था लेकिन कोरोना के कारण वापस भोपाल लौटना पड़ा। मैं खुद श्वान प्रेमी हूं और मेरे पास भी तीन श्वान थे। शहर में तब भी डाग बोर्डिंग सेंटर संचालित थे, लेकिन सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं था। मैंने सोचा क्यों न एक ऐसे डाग केयर सेंटर की शुरुआत की जाए, जहां श्वानों को फाइव स्टार होटल जैसी सुविधाएं मिले। पापा से चर्चा कर सेंटर की शुरुआत की और इसी बीच लंदन के इंटरनेशनल स्कूल आफ केनिन फिजियोलाजी का सर्टिफेकेट कोर्स आनलाइन माध्यम से कर लिया। इससे से डाग केयर और सेंटर चलाने में आसानी हो रही है। इस दौरान शहर में ऐसे ही कई और डाग बोर्डिंग सेंटर शुरू हुए थे।

सेंटर में मिलती हैं यह सुविधाएं

कोलार रोड निवासी सागर ने बताया कि जैसे ही कोई श्वान हमारे सेंटर में प्रवेश के लिए आता है, मालिक से एक फार्म भरवाया जाता है, जिसमें मालिक का नाम पता और श्वान की पूरी हिस्ट्री ली जाती है। सेंटर में कुछ 19 सामान्य और दो वीआइपी बैरक हैं। वीआइपी बैरक में नेता, बड़े उद्योगपित और अफसरों के श्वान रुकते हैं। फुल एसी परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं और हर बैरक पर श्वान की पूरी दिनचर्या और उसके खानपान की जानकारी चस्पा होती है। श्वानों का हर दिन बाडी स्पा किया जाता है। एक ही घर के दो कुत्तों को एक ही बैरक में रखने की सुविधा भी है। घुमाने के लिए इंसानी दखल से दूर एक बड़ा परिसर है। खास बात यह है कि हम श्वान को ट्रेनिंग बिल्कुल नहीं देते, बल्कि सेंटर आने वाले श्वान मालिकों को ट्रेंड किया जाता है। डाग प्लेनेट में मेरे भी तीनों श्वान रहते हैं, लेकिन बैरक से अलग। उनके आने-जाने का रास्ता भी अलग है। बाहर एक पेट शाप भी है, जहां, फूड छोड़कर उनके जरूरत की अन्य सामग्री मिलती है। हमारे सेंटर में एक घंटे से लेकर एक महीने तक के लिए श्वानों को रखा जाता है। इस दौरान कोई मालिक यदि अपने श्वान को देखना चाहे तो हम दिन में वीडियो कालिंग की सुविधा देते हैं। पशु चिकत्सक पूरे समय हमारे संपर्क में रहते हैं। सेंटर और श्वान की साफ-सफाई का पूरा केमिकल चेन्नई से आता है।

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