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दिल्ली NCR

बाली वध के बाद सेतु निर्माण, हनुमान ने अशोक वाटिका में मचाया उत्पात

नोएडा: जटायु राम को सीता की जानकारी देते हुएनोएडा में श्री सनातन धर्म रामलीला समिति मंचन की शुरुआत जटायु दाह संस्कार के उपरांत भगवान राम शबरी आश्रम की ओर निकलते है। शबरी सालों से आंखे बिछाए प्रभु राम का इंतजार कर रही होती है । तभी राम वहां पहुंचते है और वो मगन हो जाती है शबरी उन्हें अपने चुने हुए मीठे बेर खिलाती है दोनों में संवाद होता है अंत में शबरी माता को प्रभु राम द्वारा नवधा भक्ति प्रदान कर दी जाती है। बाली युद्ध के साथ, हनुमान द्वारा लंका दहन का मंचन किया गया।राम को बेर खिलाती शबरीशबरी ओहि किष्किंधा पर्वत पर सुग्रीव से मिलने का मार्ग बता कर परलोक सिधार जाती है। हनुमान जी वानरों के साथ आते है सुग्रीव के पास थी राम लक्ष्मण वहा से गुजरते है सुग्रीव की निगाह उन पर पड़ जाती है वे हनुमान जी को भेस बदल कर मिलने का आदेश देते है। हनुमान जी राम लक्ष्मण से विप्र रूप में मिलते है जिसके बाद हनुमान जी और राम जी दोनों एक दूसरे को पहचान लेते है और तभी हनुमान जी सुग्रीव से मित्रता करने की बात कह कर उनको अपने कंधो पर बैठा कर वहां से निकल पड़ते है।सुग्रीव से मिले रामराम सुग्रीव में मित्रता होती है सुग्रीव अपने कष्ट को राम जी को बताता है राम जी इसका संपूर्ण समाधान निकाल लेते है और सुग्रीव को बाली से युद्ध करने का आदेश देते है। बाली तारा आसन पर बैठे है तभी सुग्रीव आता है और आवास लगता है दोनो में युद्ध होता है जिसमे सुग्रीव पिट कर जान बचा कर भाग आता है । राम जी दोनों में से सुग्रीव की पहचान नहीं कर पाते। सुग्रीव फिर से राम के कहने पर माला गले में डाल कर बाली के पास जाता है दोनों में भयंकर युद्ध होता है। राम अपने वाण से बाली पर प्रहार करते है और बाली मारा जाता है।विलाप करते भगवान रामबहुत समय बीत जाता है सुग्रीव अपने भोग विलास में लिप्त होता है तभी लक्ष्मण क्रोध में दरबार में जाते है और क्रोध में अपना धर्म सुग्रीव को याद दिलाते है सुग्रीव सारी सेना को लेकर राम जी के पास पहुंचता है। लंका की खोज शुरू होती है वानर इधर उधर ढूंढते है तभी हनुमान जी विशाल समुंद्र किनारे और सभी बानर होते है की अब इस समुंद्र को कैसे पार किया जाए जामवंत द्वारा हनुमान की शक्ति को याद दिलाया जाता है और हनुमान जी आकाश में उड़ अकेले लंका की ओर निकल जाते है।राम ने बालि का किया वधपहले हनुमान को सुरसा मिलती हैं उसके बाद लंकनी और फिर एक स्थान से राम की आवाज आती जिसे सुन हनुमान जी नीचे उतरते है वहा विभीषण होते है दोनों में वार्तालाप होता है और विभीषण द्वारा अशोक वाटिका का रास्ता बता दिया जाता है। सीता त्रिजटा के साथ अशोक वाटिका में बैठी गीत गा रही है हनुमान पेड़ के पीछे हैं तभी वहां रावण मंदोदरी के संग पहुंचता है।अशोक वाटिका में बैठी सीताऔर दोनों में संवाद होता है अंत में रावण सीता को 1 महीने में बात ना मानने पर मृत्युदंड देने की बात कह कर निकल पड़ता है तभी हनुमान जी राम जी द्वारा दी गई अंगूठी को गिरा देते हैं जिसे देख सीता पहले तो डर जाती ।रावण दरबार में हनुमान को ले जाते हुएरावण दरबार लगा हुआ है सभी योद्धा बैठे हैं नृत्य चल रहा है तभी एक सैनिक आता है और बताता है कि उनके अशोक वाटिका में वानर आया है जिसने बहुत उत्पात मचा रखा है इसको सुन रावण का पुत्र अक्षय कुमार अशोक वाटिका में जाता है और हनुमान से युद्ध करता है अंत में अक्षय कुमार मृत्यु को प्राप्त हो जाता है।

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