ब्रेकिंग
मुरैना में 'जहर' पर मेहरबानी: क्या मिलावटखोरों के 'कवच' बन गए हैं अधिकारी गुप्ता? मुरैना पुलिस की 'सेलेक्टिव होली': सच दिखाने वालों से दूरी, वाह-वाही करने वालों पर 'रंग' की बौछार! यूजीसी और आरक्षण को लेकर अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की दो दिवसीय राष्ट्रीय बैठक इंदौर में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी घोषित मंडला पुलिस की त्वरित कार्रवाई डकैती के पांच आरोपी जबलपुर से गिरफ्तार, रकम एवं उपयोग की गई कार बरामद भिंड के गोहद चौराहा थाना क्षेत्र के बिरखडी गांव के पास तेज़ रफ़्तार ट्रक ने ट्रेक्टर ट्रॉली में मारी... असम में राजधानी एक्सप्रेस से टकराकर 7 हाथियों की मौतः एक घायल; ट्रेन के 5 डिब्बे-इंजन पटरी से उतरे भिंड में रेत माफियाओं पर कार्रवाई के समय रेत माफियाओं ने एसडीएम की गाड़ी को मारी टक्कर बाल-बाल बचे। अधिकारियों की प्रताड़ना से तंग आकर पोस्ट मेन ने फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला की समाप्त ग्वालियर पुलिस लाइन के क्वार्टर में प्रधान आरक्षक ने की आत्महत्या, मचा हड़कंप
मध्यप्रदेश

गैर बासमती चावल के सात देशों में सीमित निर्यात को मंजूरी, मात्रा भी तय

इंदौर। केंद्र सरकार ने गैर बासमती चावल के 10.34 लाख टन के निर्यात को मंजूरी दी है। निर्यात की यह मंजूरी सात देशों के लिए दी गई है। खास बात है कि निर्यात सरकार से सरकार के स्तर पर ही होगा। उल्लेखनीय है कि 20 जुलाई से सरकार ने गैर बासमती चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था। देश में खाद्य सुरक्षा की चंता और बढ़ती कीमतों को थामने के लिए यह कदम उठाया था।

गुरुवार को चावल निर्यात के लिए लिखित आदेश जारी किया गया। इसमें तमाम शर्तें भी डाली गई है। निर्यात के शिपमेंट नेशनल कोआपरेटिव एक्सपोर्ट लिमिटेड के जरिए ही जाएंगे। चावल की अधिकतम मात्रा भी अलग-अलग देशों के लिए तय कर दी गई है। फिलिपींस के लिए 2.95 लाख टन। कैमरून के लिए 1.9 लाख टन। मलेशिया के लिए 1.7 लाख टन। नेपाल के लिे 95000 टन के साथ सेशल्स और कोस्टारिका, गुयाना जैसे देश इस सूची में शामिल है।

कीमतों पर दबाव

भले ही सरकार ने सीमित निर्यात की अनुमति दी है लेकिन देश के बाजार पर कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा। निर्यातक दयालदास अजीतकुमार कहते हैं दरअसल इससे पहले बासमती चावल के लिए सरकार 1200 डालर की न्यूनतम कीमत तय कर सकती है। यानी इस कीमत या इससे ज्यादा मूल्य पर ही निर्यात सौदे हो सकते हैं। यह इसलिए किया ताकि गैर बासमती चावल निर्यात न किए जा सके। इस कीमत पर निर्यात सौदे नहीं हो रहे। ऐसे में देश की चावल मिलो के पास धान का भरावा बढ़ता जा रहा है। देश में कीमतों पर दबाव बना हुआ है। दीवाली बाद कीमतों में नरमी की उम्मीद की जा रही है। दरअसल सरकार संभली हुई है क्योंकि पहले मानसून देरी से आया। फिर अगस्त में तेज बरसात ने धान की फसल को पंजाब-हरियाणा में नुकसान पहुंचाया। इसलिए सरकार निर्यात की अनुमति देकर महंगाई बढ़ाने का खतरा मोल नहीं लेना चाहती।

Related Articles

Back to top button