ब्रेकिंग
मुरैना में 'जहर' पर मेहरबानी: क्या मिलावटखोरों के 'कवच' बन गए हैं अधिकारी गुप्ता? मुरैना पुलिस की 'सेलेक्टिव होली': सच दिखाने वालों से दूरी, वाह-वाही करने वालों पर 'रंग' की बौछार! यूजीसी और आरक्षण को लेकर अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की दो दिवसीय राष्ट्रीय बैठक इंदौर में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी घोषित मंडला पुलिस की त्वरित कार्रवाई डकैती के पांच आरोपी जबलपुर से गिरफ्तार, रकम एवं उपयोग की गई कार बरामद भिंड के गोहद चौराहा थाना क्षेत्र के बिरखडी गांव के पास तेज़ रफ़्तार ट्रक ने ट्रेक्टर ट्रॉली में मारी... असम में राजधानी एक्सप्रेस से टकराकर 7 हाथियों की मौतः एक घायल; ट्रेन के 5 डिब्बे-इंजन पटरी से उतरे भिंड में रेत माफियाओं पर कार्रवाई के समय रेत माफियाओं ने एसडीएम की गाड़ी को मारी टक्कर बाल-बाल बचे। अधिकारियों की प्रताड़ना से तंग आकर पोस्ट मेन ने फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला की समाप्त ग्वालियर पुलिस लाइन के क्वार्टर में प्रधान आरक्षक ने की आत्महत्या, मचा हड़कंप
मध्यप्रदेश

MP के सागर में खेत में मिला अंग्रेजों के जमाने का सौ साल पुराना बम, जानकारों ने बताया कितना था खतरा

सागर। सुरखी थाना क्षेत्र के मोरपाली गांव के खेत में सौ साल पुराना बम मिला, जिसके बाद जिला बम निरोधक दस्ते ने बम को ब्लास्ट कर उसे नष्ट किया। अंग्रेजों के जमाने का यह बम इतना घातक था कि 100 मीटर के दायरे में आने वाली हर चीज को यह पूरी तरह से नष्ट करने में सक्षम था।

दरअसल रविवार की शाम मोरपाली के खेत में किसान जब पिलाऊ कर रहा था तभी ट्रैक्टर में कुछ फंसा, जिसके बाद किसान ने खेत में देखा तो उसे बम नुमा वस्तु दिखाई दी। इसकी सूचना उसने डायल 100 को दी। पुलिस कंट्रोल रूम की सूचना के बाद जिले का बम निरोधक दस्ता मौके पर पहुंचा।

लेकिन तब तक अंधेरा होने लगा था, इस कारण बम को खेत में ही सुरक्षित कर दिया गया। सुबह स्थानीय थाना क्षेत्र की पुलिस के साथ बम निरोधक दस्ते ने मौके पर जाकर खेत के आसपास का इलाका खाली कराया और खेत के पास ही करीब साढ़े तीन फीट गहरा गड्ढा खोदकर बम को उस गड्ढे में डाल दिया। इसके बाद टीम के एक्सपर्ट ने बम को विस्फोट में विस्फोट कर दिया।

100 मीटर के एरिया को तबाह करने में सक्षम

बम निरोधक दस्ते के सदस्य संजय पांडेय ने बताया कि बम सन 1925 के आसपास का था। करीब 12 किलोग्राम वजनी और 14 इंच लंबा बम के विस्फोट होते ही पूरा इलाका उसकी गूंज से कांप गया। इस बम का कवर एरिया करीब एक किलोमीटर है। वहीं 100 मीटर के एरिया को यह पूरी तरह से नस्तेनाबूद करने में सक्षम है। अंग्रेजों के समय सेना के अभ्यास के दौरान चलाए जाने वाले बम कई बार नहीं फटते और वह जमीन में गढ़ जाते हैं। यह उन्हीं बमों में से एक था।

Related Articles

Back to top button