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इंदौर विधानसभा क्षेत्र एक से ज्यादा तीन नंबर की चर्चा

भारतीय जनता पार्टी ने विधानसभा चुनाव के लिए अपनी दूसरी सूची में दिग्गजों को मैदान में उतारकर चौंका दिया है। इंदौर में भी एक नंबर विधानसभा क्षेत्र में पार्टी ने राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय को उम्मीदवार बनाया है। राजनीतिक गलियारों और लोगों के बीच जितनी चर्चा एक नंबर से विजयवर्गीय के टिकट की है, उससे ज्यादा चर्चा तीन नंबर से आकाश विजयवर्गीय को टिकट मिलेगा या नहीं, इस पर हो रही है। यह भी चर्चा है कि अगर आकाश को टिकट नहीं दिया गया, तो तीन नंबर से पार्टी का उम्मीदवार कौन होगा। भाजपा हमेशा से परिवारवाद को मुद्दा बनाती रही है, ऐसे में माना जा रहा है कि पिता कैलाश को टिकट मिल गया है तो अब पुत्र आकाश का उम्मीदवार बनना मुश्किल है। इस नए समीकरण के चलते तीन नंबर में कई दावेदार सक्रिय हो गए हैं। इनमें कई नाम ऐसे भी हैं, जो अब तक एक नंबर से दावेदारी कर रहे थे।

गुटबाजी अपनी जगह, मुंह मीठा कराना तो बनता है

इंदौर भाजपा में इस समय सबसे ज्यादा गुटबाजी यदि कहीं देखी जा रही है, तो वह है अयोध्या यानी विधानसभा क्षेत्र चार। यहां पूर्व महापौर व विधायक मालिनी गौड़, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, सांसद शंकर लालवानी अपने समर्थकों के साथ सक्रिय रहते हैं। पार्षद कंचन गिदवानी के टिकट से लेकर एमआइसी और अपील समिति में शामिल कराने को लेकर सांसद और विधायक खेमे में जितनी खींचतान दिखी थी, वैसी किसी अन्य पार्षद को लेकर नहीं दिखी। आखिर में मालिनी गौड़ की सहमति से गिदवानी को टिकट तो मिल गया था, मगर वे एमआइसी में शामिल नहीं हो पाई थीं। हाल ही में महिला आरक्षण विधेयक पारित होने के बाद महिला मोर्चा के एक कार्यक्रम में मालिनी गौड़ और गिदवानी की एक फोटो ने लोगों का खूब ध्यान खींचा। इसे देख लोग कह रहे हैं कि गुटबाजी अपनी जगह है, पर सबके सामने मुंह मीठा तो कराना ही पड़ता है।

मिलों से ज्यादा दिखी झांकीबाजों की झांकियां

चुनावी वर्ष होने से इंदौर में इस बार हर पर्वों का उत्साह कुछ ज्यादा ही है। गणेशोत्सव में भी इस साल खूब धूम देखने को मिली। अनंत चतुर्दशी की रात निकले झांकियों के कारवां में भी यह उत्साह चरम पर रहा। आमतौर पर झांकियां इंदौर में बंद हो चुकीं कपड़ा मिलों के मजदूर संघों और खजराना, नगर निगम, आइडीए आदि के द्वारा बनाई जाती है, मगर इस बार कई अन्य संस्थाएं भी जुड़ी नजर आईं। चुनावी वर्ष होने से झांकीबाजों यानी टिकट के दावेदारों की झांकियां ज्यादा नजर आई। पूर्व विधायक सत्यनारायण पटेल के गीता रामेश्वर ट्रस्ट, युवा आयोग के अध्यक्ष निशांत खरे की संस्था श्री योगेश्वर और अक्षय कांति बंम की संस्था केसरिया की झांकियां भी इस बार कारवां में शामिल दिखीं। झांकियों के स्वागत के लिए लगाए गए मंचों पर भी अखाड़ों के उस्तादों से ज्यादा टिकट के दावेदारों के फोटो नजर आ रहे थे।

नेताओं के चक्कर काट रही लाड़ली बहना

लाड़ली बहना योजना शिवराज सरकार के लिए गेमचेंजर मानी जा रही है। इस योजना के जरिए महिला मतदाताओं पर सरकार और पार्टी फोकस कर रही है। हर महीने की 10 तारीख को लाड़ली बहना के खातों में किस्त पहुंचती है। इस माह योजना की राशि बढ़कर 1500 रुपये हो सकती है। ऐसे में उन महिलाओं का भी मन इस योजना में शामिल होने को ललचा रहा है, जो इससे वंचित हैं। जिन महिलाओं का लाड़ली बहना योजना में पंजीयन नहीं हुआ है, वे भाजपा नेताओं, पार्षदों और विधायकों के चक्कर काट रही हैं। इस समय पंजीयन बंद हैं। चुनाव को देखते हुए नेता सीधे मना नहीं कर पा रहे हैं, वे आश्वासन देकर किसी तरह से महिलाओं को मना रहे हैं। अब तक लाड़ली बहना योजना में 1.25 करोड़ महिलाएं जुड़ चुकी हैं।

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