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मध्यप्रदेश

किस्सा कुर्सी का, बात गृहमंत्री नरोत्तम के गढ़ दतिया की.. 2018 में बेहद कम वोटों से जीते, क्या इस बार जीत बरकरार रख पाएंगे नरोत्तम?

मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव की रणभेरी बज चुकी है। चुनावी दौड़ में सभी राजनीतिक दल जोर-शोर से अपना पलड़ा भारी करने में लगे हुए हैं। बात अगर दतिया विधानसभा सीट की करें तो, यहां से मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा चुनकर आते हैं। तो आइए आज जानते हैं की दतिया में नरोत्तम कितने मजबूत हैं, और क्या इस बार भी वे यहां कमल खिला पाएंगे।

2018 में महज 2656 वोटों के अंतर से जीते थे नरोत्तम…
मध्य प्रदेश बीजेपी के सबसे मजबूत नेताओं में शुमार नरोत्तम मिश्रा 2018 में बहुत ही मामूली वोटों से जीत दर्ज कर पाए थे। इस वक्त नरोत्तम को कुल 72209 वोट मिले, तो वहीं कांग्रेस के प्रत्याशी को 69553 वोट मिले थे। इस कांटे की टक्कर में नरोत्तम सिर्फ 2 हजार 656 वोटों से ही जीत पाए थे। जो कहीं न कहीं ये दर्शाता है कि दतिया में कांग्रेस भी मजबूत है। लेकिन ऐसा क्यों हुआ, इसके बारे में आगे चर्चा करेंगे। पहले जानते हैं की 2013 और 2008 में दतिया के चुनाव परिणाम कैसे थे।

2013 में क्या था सूरत ए हाल
अब हम बात करेंगे 2013 विधानसभा चुनावों के रिजल्ट की। 2013 में प्रदेश भर की 230 सीटों में बीजेपी ने 165 सीटें जीती थी। इस चुनाव में कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया था। कांग्रेस को सिर्फ 58 सीटों से संतोष करना पड़ा था। इस साल दतिया से बीजेपी प्रत्याशी नरोत्तम मिश्रा को 57438 वोट मिले तो वहीं कांग्रेस के प्रत्याशी राजेंद्र भारती को 45357 वोट मिले थे। नरोत्तम मिश्रा ने इस चुनाव में करीब 12 हजार वोटों से बड़ी जीत दर्ज की थी।

2008 में दतिया विधानसभा के परिणाम
वहीं अगर बात की जाए 2008 के विधानसभा चुनावों की, तो बीजेपी के नरोत्तम मिश्रा ने 34489 वोट हासिल किए, तो वहीं उनके प्रतिद्वंदी राजेंद्र भारती ने 23256 वोट हासिल किए। इस हिसाब से नरोत्तम मिश्रा ने 11 हजार 233 वोटों से एक बड़ी जीत दर्ज की।

2008 और 2013 के मुकाबले 2018 में बेहद कम अंतर से जीते नरोत्तम…
देखा जाए तो 2008 औऱ 2013 में नरोत्तम मिश्रा ने दतिया विधानसभा सीट में बड़ी जीत दर्ज की थी। लेकिन 2018 में नरोत्तम महज 2656 वोटों से ही जीत पाए। इसके पीछे खुद गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने एक निजी चैनल को इंटरव्यू देते हुए ये तर्क दिया था, कि पिछले बार बुंदेलखंड में ज्योतिरादित्य सिंधिया का दबदबा था, क्षेत्र में उनकी वजह से कांग्रेस मजबूत थी, और कई अन्य मुद्दे भी थे जो लगातार हावी थे। लेकिन इस बार न तो कोई मुद्दा है, और अब तो सिंधिया भी भाजपा में हैं।

अब दतिया विधानसभा का चुनावी परिणाम 2023 में क्या होगा, ये तो वक्त ही बताएगा। लेकिन मौजूदा दौर में गृहमंत्री नरोत्तम ये दावा कर रहे हैं, कि इस बार दतिया में वे रिकॉर्ड तोड़ मतों से जीतेंगे

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