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मध्यप्रदेश

तीन साल से खाली है एमपी विधानसभा उपाध्यक्ष का पद, ये है नियुक्ति की परंपरा

भोपाल। प्रदेश विधानसभा उपाध्यक्ष का पद पिछले तीन साल से खाली है। वर्ष 1962 में विपक्ष के विधायक नरबदा प्रसाद श्रीवास्तव को पहली बार विधानसभा उपाध्यक्ष बनाने के साथ इसकी शुरू हुई थी। यह पद हमेशा से विपक्ष के पास रहा है, लेकिन राजनीतिक विचारधारा में भिन्नता के चलते विधानसभा के उपाध्यक्ष का पद पहली बार तीन साल से नहीं भरा जा सका है।

राजेंद्र कुमार सिंह 10 जनवरी 2014 से 13 दिसंबर 2018 तक उपाध्यक्ष रहे। इसके बाद कांग्रेस की सरकार आने पर तत्कालीन मुख्यमंत्री कमल नाथ के 15 माह के कार्यकाल में विपक्ष के पास रहने वाले उपाध्यक्ष के पद पर कांग्रेस की विधायक हिना कांवरे को बैठाया गया। वे 10 जनवरी 2019 से 24 मार्च 2020 तक उपाध्यक्ष रहीं। सत्ता परिर्वतन के बाद से यह पद खाली और अब भरा भी नहीं जाएगा क्योंकि अगले माह विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लग जाएगी और सब चुनाव में जुट जाएंगे। ऐसे में अब यह पद नई सरकार बनने के बाद ही भरा जा सकेगा।

पक्ष और विपक्ष में विधानसभा के ये रहे उपाध्यक्ष

  • वर्ष 1956 में मप्र के गठन के बाद से विधानसभा में उपाध्यक्ष का पद विपक्ष को न देने की आम परंपरा थी।
  • वर्ष 1962 में पहली बार विरोधी दल की ओर से नरबदा प्रसाद श्रीवास्तव उपाध्यक्ष चुने गए। 1964 में भी वे पुनः उपाध्यक्ष बने।
  • तीन मार्च 1990 तक किसी विपक्षी विधायक को उपाध्यक्ष का पद नहीं दिया गया।
  • भाजपा सरकार में पहली बार तत्कालीन मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा ने विधानसभा का उपाध्यक्ष पद विपक्षी दल कांग्रेस को सौंपा।
  • कांग्रेस विधायक श्रीनिवास तिवारी 23 मार्च 1990 से 15 दिसंबर 1992 तक उपाध्यक्ष रहे।
  • तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की सरकार में विपक्षी दल भाजपा के भेरुलाल पाटीदार 28 दिसंबर 1993 से एक दिसंबर 1998 तक रहे।
  • ईश्वरदास रोहाणी 11 फरवरी 1999 से पांच दिसंबर 2003 तक उपाध्यक्ष रहे।
  • पुनः भाजपा की तीन बार सरकार आने पर विपक्षी दल कांग्रेस के हजारीलाल रघुवंशी 18 दिसंबर 2003 से 11 दिसंबर 2008 तक।
  • हरवंश सिंह 13 जनवरी 2009 से 14 मई 2013 तक।
  • राजेंद्र सिंह 10 जनवरी 2014 कुमार 13 दिसंबर 2018 तक उपाध्यक्ष रहे।
  • 15 माह की कमल नाथ सरकार में हिना कांवरे 10 जनवरी 2019 से 24 मार्च 2020 तक उपाध्यक्ष रहीं।
  • 2020 में भाजपा की सरकार आने के बाद पक्ष या विपक्ष से किसी को भी अब तक उपाध्यक्ष नहीं बनाया गया है।

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