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मध्यप्रदेश

जापान में लगेगी गोंड चित्रकार भज्जू श्याम के चित्रों की प्रदर्शनी

भोपाल। पद्मश्री सम्मान प्राप्त गोंड चित्रकार भज्जू श्याम के चित्रों की प्रदर्शनी जापान में लगने जा रहा है। यह चित्र प्रदर्शनी जापान के विश्व धरोहर स्थल तोजी टेंपल में लगेगी और 11 से शुरू होकर 29 अगस्त तक चलेगी। कल्चर एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत जापान्डिया नामक संस्था द्वारा उन्हें आमंत्रित किया गया है। क्योटो शहर में लगने वाली यह प्रदर्शनी जापान में उनकी पहली एकल चित्र प्रदर्शनी होगी।

भज्जू श्याम ने बताया कि इसके पूर्व उनके चित्रों का प्रदर्शन कई देशों में लग चुकी है। भज्जू नौ अगस्त को पत्नी दीपा श्याम के साथ भोपाल से जापान के लिए रवाना होंगे। बता दें कि भज्‍जू श्‍याम को वर्ष 2018 में भारत सरकार द्वारा ‘पद्मश्री’ से नवाजा गया था।

आसान नहीं था सफर

गौरतलब है कि डिंडौरी के छोटे से गांव पाटनगढ़ के रहने वाले गोंड चित्रकार भज्‍जू श्याम मजदूरी के लिए भी कभी डिंडौरी के गांव-गांव भटकते थे। आर्थिक तंगी से उपजी परिस्‍थितियों और परिवारिक जिम्मेदारी के चलते उन्‍हें काम की तलाश में महज 16 वर्ष की उम्र में ही घर छोड़ना पड़ा। काम की तलाश में वह नब्‍बे के दशक में भोपाल पहुंचे। यहां उन्होंने सिक्योरिटी गार्ड के साथ मजदूरी भी की। लेकिन तमाम मुश्किलों के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी।

चाचा से सीखा चित्रकारी का हुनर

मशहूर चित्रकार जन गण सिंह श्याम उनके चाचा हैं। जब जब जन गण सिंह ने अपने भतीजे भज्जू को काम की तलाश में यहां-वहां भटकता देखा तो अपने पास बुला लिया। यहां भज्जू श्याम चाचा के कहने पर उनके द्वारा बनाई गई पेंटिंग में रंग भरने लगे। चाचा के सान्‍निध्‍य में रहते हुए उनकी पेंटिंग में रंग भरने के काम में लगाना भज्जू श्याम के जीवन का टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ। धीरे-धीरे भज्‍जू भी खूबसूरत चित्र बनाने लगे। भज्जू ने बताया कि उन्हे चित्रकारी के बारे में कुछ भी मालूम नहीं थी, लेकिन धीरे-धीरे रंग भरते-भरते वे इस मुकाम तक पहुंच गए कि देश- विदेश में उनकी पेंटिंग की चर्चा होने लगी।

विदेशों में पहले भी लग चुकी है चित्र प्रदर्शनी

चाचा के मार्गदर्शन में भज्जू श्याम की प्रतिभा धीरे-धीरे निखरने लगी। उनकी प्रतिभा ने दिल्ली प्रदर्शनी से लेकर लंदन और पेरिस तक का सफर तय करा दिया। भज्जू श्याम चित्रकला पर किताबें भी लिख चुके हैं, जिनमें उनकी ‘लंदन जंगल बुक’ पांच विदेशी भाषाओं में प्रकाशित हो चुकी है।

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