ब्रेकिंग
मुरैना में 'जहर' पर मेहरबानी: क्या मिलावटखोरों के 'कवच' बन गए हैं अधिकारी गुप्ता? मुरैना पुलिस की 'सेलेक्टिव होली': सच दिखाने वालों से दूरी, वाह-वाही करने वालों पर 'रंग' की बौछार! यूजीसी और आरक्षण को लेकर अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की दो दिवसीय राष्ट्रीय बैठक इंदौर में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी घोषित मंडला पुलिस की त्वरित कार्रवाई डकैती के पांच आरोपी जबलपुर से गिरफ्तार, रकम एवं उपयोग की गई कार बरामद भिंड के गोहद चौराहा थाना क्षेत्र के बिरखडी गांव के पास तेज़ रफ़्तार ट्रक ने ट्रेक्टर ट्रॉली में मारी... असम में राजधानी एक्सप्रेस से टकराकर 7 हाथियों की मौतः एक घायल; ट्रेन के 5 डिब्बे-इंजन पटरी से उतरे भिंड में रेत माफियाओं पर कार्रवाई के समय रेत माफियाओं ने एसडीएम की गाड़ी को मारी टक्कर बाल-बाल बचे। अधिकारियों की प्रताड़ना से तंग आकर पोस्ट मेन ने फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला की समाप्त ग्वालियर पुलिस लाइन के क्वार्टर में प्रधान आरक्षक ने की आत्महत्या, मचा हड़कंप
मध्यप्रदेश

इंदौर के जिला न्यायालय परिसर में स्टांप की हो रही कालाबाजारी

इंदौर। इंदौर जिला न्यायालय परिसर में स्टांप की कालाबाजारी हो रही है। इंदौर अभिभाषक संघ के अध्यक्ष गोपाल कचोलिया ने बताया कि परिसर में कई स्टांप वेंडर 50 रुपये के स्टांप को 60, 70 रुपये में बेच रहे हैं। इसी तरह 100 रुपये का स्टांप 120, 130 रुपये में बेचा जा रहा है। इसके चलते पक्षकारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

अभिभाषक संघ ने प्रधान जिला व सत्र न्यायाधीश, इंदौर कलेक्टर और जिला पंजीयक को इस संबंध में पत्र लिखा है। इसमें मांग की है कि जिला न्यायालय परिसर में स्टांप की कालाबाजारी करने वाले स्टांप वेंडरों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। इंदौर जिला न्यायालय परिसर में डेढ़ दर्जन से ज्यादा स्टांप वेंडर हैं।

क्लर्क कालोनी एक्सटेंशन और इलेक्ट्रानिक काम्प्लेक्स को लेकर हाई कोर्ट में सुनवाई

इंदौर। क्लर्क कालोनी एक्टेंशन और इलेक्ट्रानिक काम्प्लेक्स की वैधता को लेकर हाई कोर्ट में सोमवार को सुनवाई होनी है। पिछली सुनवाई पर कोर्ट ने शासन से पूछा था कि क्यों न क्लर्क कालोनी और इलेक्ट्रानिक काम्प्लेक्स को अवैध घोषित कर दें। सरकार को इसी सवाल का जवाब सोमवार को देना है।

बगैर मौका मुआयना विकास कार्य को मान लिया पूर्ण

इस मामले में हाई कोर्ट में चल रही जनहित याचिका में कहा है कि तत्कालीन अधिकारियों ने कालोनाइजर को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से साठगांठ कर फर्जी शपथ पत्र स्वीकारा है। उन्होंने बगैर मौका निरीक्षण किए विकास कार्य को पूर्ण मान लिया और इसी आधार पर भूखंडों को बंधन मुक्त कर दिया गया। इसका लाभ उठाते हुए कालोनाइजर ने कमजोर आय वर्ग को दिया जाने वाले भूखंड भी बेच दिए। उपायुक्त सहकारिता ने भी जांच में गड़बड़ी की बात स्वीकारी थी।

शिकायत के बाद भी नहीं किया कालोनी का विकास

याचिका में कहा है कि अधिकारियों के इस कृत्य की वजह से शासन को बेशकीमती जमीन के राजस्व की हानि उठाना पड़ी। रहवासियों की शिकायत के बावजूद कालोनाइजर द्वारा विकास नहीं किया गया। याचिका में इंदौर टेक्सटाइल कर्मचारी गृह निर्माण सहकारी संस्था को भी पक्षकार बनाया गया है। हाई कोर्ट में यह याचिका एडवोकेट मनीष यादव और एडवोकेट अदिति यादव के माध्यम से दायर हुई है।

Related Articles

Back to top button