ब्रेकिंग
मुरैना में 'जहर' पर मेहरबानी: क्या मिलावटखोरों के 'कवच' बन गए हैं अधिकारी गुप्ता? मुरैना पुलिस की 'सेलेक्टिव होली': सच दिखाने वालों से दूरी, वाह-वाही करने वालों पर 'रंग' की बौछार! यूजीसी और आरक्षण को लेकर अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की दो दिवसीय राष्ट्रीय बैठक इंदौर में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी घोषित मंडला पुलिस की त्वरित कार्रवाई डकैती के पांच आरोपी जबलपुर से गिरफ्तार, रकम एवं उपयोग की गई कार बरामद भिंड के गोहद चौराहा थाना क्षेत्र के बिरखडी गांव के पास तेज़ रफ़्तार ट्रक ने ट्रेक्टर ट्रॉली में मारी... असम में राजधानी एक्सप्रेस से टकराकर 7 हाथियों की मौतः एक घायल; ट्रेन के 5 डिब्बे-इंजन पटरी से उतरे भिंड में रेत माफियाओं पर कार्रवाई के समय रेत माफियाओं ने एसडीएम की गाड़ी को मारी टक्कर बाल-बाल बचे। अधिकारियों की प्रताड़ना से तंग आकर पोस्ट मेन ने फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला की समाप्त ग्वालियर पुलिस लाइन के क्वार्टर में प्रधान आरक्षक ने की आत्महत्या, मचा हड़कंप
मध्यप्रदेश

हाई कोर्ट पहुंचा सीधी पेशाब कांड एनएसए की कार्रवाई को दी गई चुनौती

 जबलपुर। हाई कोर्ट में एक याचिका के जरिए बहुचर्चित सीधी पेशाब कांड के आरोपित प्रवेश शुक्ला के एनएसए की कार्रवाई को चुनौती दी गई है। यह याचिका प्रवेश की पत्नी कंचन शुक्ला ने दायर की है। जिनका तर्क है कि इस प्रकरण को राजनीतिक तूल देते हुए उनके पति को एनएसए के तहत जेल भिजवाया गया है।

शासकीय अधिवक्ता को दी गई जिम्मेदारी

सोमवार को मुख्य न्यायाधीश रवि मलिमठ व न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की युगलपीठ ने याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए शासकीय अधिवक्ता को इस सिलसिले में राज्य शासन से निर्देश हासिल कर अवगत कराने की जिम्मेदारी सौंप दी है।

याचिकाकर्ता की ओर से यह दी गई दलील

याचिकाकर्ता सीधी निवासी कंचन शुक्ला की ओर से अधिवक्ता अनिरुद्ध मिश्रा ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि याचिकाकर्ता का पति प्रवेश एक राजनीतिक दल का कार्यकर्ता था। एक वीडियो वायरल हुआ, जिसके जरिए आरोप लगाया कि प्रवेश ने आदिवासी व्यक्ति के ऊपर पेशाब कर अपमानित किया है। चूंकि याचिकाकर्ता का पति का सत्ताधारी दल से संबंधित कार्यकर्ता था, अत: विरोधी दलों ने इस मुद्दे को लेकर माहौल बनाना शुरू कर दिया। जिसका नजीता यह हुआ कि एनएसए जैसी कठोर कार्रवाई बिना किसी ठोस विधिक आधार के कर दी गई। याचिकाकर्ता के पति को कोई आपराधिक रिकार्ड नहीं है। लिहाजा, एनएसए की कार्रवाई कानूनन अवैध है। यह कार्रवाई संविधान के अनुच्छेद-21 के सर्वथा विरुद्ध है। हाई कोर्ट से अपेक्षा की गई कि हस्तक्षेप कर अनुचित कार्रवाई को निरस्त किया जाए।

Related Articles

Back to top button