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मध्यप्रदेश

नियमों का पालन कराने वालों ने किया वाइल्ड लाइफ एक्ट का उलघंन

उमरिया। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में वाइल्ड लाइफ एक्ट का पालन कराने वालों ने ही वन्य प्राणियों की सुरक्षा के लिए बनाए गए इस कानून का उलघंन कर दिया। एक हाथी की मौत के बाद उसे चुपचाप जलाने के सात महीने बाद इस मामले में कोई कार्रवाई हुई तो सिर्फ तीन लोगों के निलंबन की। जबकि अगर किसी आदिवासी ने गलती से एक सूअर भी मार लिया होता तो उसे गिरफ्तार करके उसके साथ विश्व कप जीतने जैसा फोटो खिंचाया जाता और उसका खूप प्रचार किया जाता। इस मामले में एक रेंजर, डिप्टी रेंजर और फारेस्ट गार्ड को भी इसलिए सस्पेंड किया गया है ताकि पाप के दाग और ऊपर तक न पहुंच सकें। इस मामले में पनपथा रेंजर शील सिंधु श्रीवास्तव, डिप्टी रेंजर कमला कोल और फारेस्ट गार्ड शैलेन्द्र मिश्रा को सस्पेंड किया गया है। हालांकि यह जानकारी भी सामने आ रही है कि वाइल्ड क्राइम कंट्रोल ब्यूरो दिल्ली ने इस मामले में रेंज और डिप्टी रेंजर सहित पांच लोगों के लिए वाइल्ड लाइफ एक्ट के तहत अपराध भी दर्ज कर लिया है।

राख को गड्ढों में दफनाया था

वाइल्ड लाइफ एक्ट का पालन करने वाले वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने कितना जघन्य अपराध किया है इसका पता तो इसी बात से चल जाता है कि हाथी के शव को जलाने के बाद सबूत मिटाने के लिए उसकी राख को छह गहरे गड्ढों में दफन कर दिया गया। वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (डब्ल्यूसीसीबी ) ने इस मामले में पांच लोगों के खिलाफ अपराध दर्ज कर लिया है। हालांकि अभी आरोपितों की गिरफ्तारी के बारे में कोई जानकारी सामने नहीं आ रही है। जबकि मध्यप्रदेश के मुख्य वन्य जीव वार्डन जेएस चौहान ने अधिकारियों के खिलाफ जांच की पुष्टि की है।

प्रोटोकाल का उलघंन

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में किसी भी वन्य प्राणी की मौत के बाद घटना स्थल के निरीक्षण, पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार तक एक निर्धारित प्रोटोकाल का पालन किया जाता है। घटना स्थल का न सिर्फ निरीक्षण किया जाता है बल्कि जांच की जाती है ताकि घटना का सही आंकलन हो सके। इसके बाद डॉक्टरों की एक टीम के माध्यम से वन्य प्राणी के शव का पीएम कराया जाता है। पीएम के बाद अधिकारियों, एनटीसीए के सदस्य की मौजूदगी में वन्य प्राणी के शव का अंतिम संस्कार किया जाता है। इस प्रोटोकाल को फालो करने का कारण यह है कि वन्य प्राणी की मौत के कारण को लेकर किसी तरह का संशय न रह जाए और उसके शरीर के अंगो का दुरुपयोग न होने पाए। जबकि इस मामले में सारे नियम कायदों को दरकिनार कर हाथी के शव को चुपचाप जला दिया गया।

अंगों का क्या हुआ पता नहीं

इस मामले में एक बड़ा सवाल अभी भी खड़ा है कि जंगली हाथी के दांत और हडि्डयों का क्या हुआ। कहीं ऐसा तो नहीं कि यह सारा खेल दांत और हडि्डयों के लिए ही खेला गया हो। जब यह सवाल उत्पन्न होता है तो इसके साथ एक दूसरा सवाल भी खड़ा हो जाता है कि कहीं ऐसा तो नहीं कि दांत के लिए पहले हाथी का शिकार किया गया हो और फिर उसे चुपचाप जला दिया गया हो। जब वाइल्ड लाइफ एक्ट की रक्षा करने वाले निर्धारित प्रोटोकाल का उलघंन करके हाथी के शव को चुपचाप जला सकते हैं तो वे कुछ भी कर सकते हैं। इस घटनाक्रम के सामने आने के बाद अब तो इस बात की भी आशंका व्यक्त की जाने लगी है कि हाथी के शव को जलाने के अलावा भी इसी तरह कहीं कोई और घटना तो जंगल के अंदर नहीं होती रही है जिसका अभी खुलासा न हुआ हो।

बयान में घुमाया

डब्ल्यूसीसीबी के अधिकारियों ने जब वन विभाग के संदेहियो से सवाल जवाब किए तब भी उन्होंने वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो के लोगों को घुमाने का प्रयास किया। उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं दिए।हालांकि वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो अभी भी इस मामले में जांच कर रहा है कि आखिर हाथी की मौत कैसे हुई और उसके शव को जलाने के पीछे पनपथा रेंज के रेंजर और कर्मचारियों की मंशा क्या थी।

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