ब्रेकिंग
मुरैना में 'जहर' पर मेहरबानी: क्या मिलावटखोरों के 'कवच' बन गए हैं अधिकारी गुप्ता? मुरैना पुलिस की 'सेलेक्टिव होली': सच दिखाने वालों से दूरी, वाह-वाही करने वालों पर 'रंग' की बौछार! यूजीसी और आरक्षण को लेकर अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की दो दिवसीय राष्ट्रीय बैठक इंदौर में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी घोषित मंडला पुलिस की त्वरित कार्रवाई डकैती के पांच आरोपी जबलपुर से गिरफ्तार, रकम एवं उपयोग की गई कार बरामद भिंड के गोहद चौराहा थाना क्षेत्र के बिरखडी गांव के पास तेज़ रफ़्तार ट्रक ने ट्रेक्टर ट्रॉली में मारी... असम में राजधानी एक्सप्रेस से टकराकर 7 हाथियों की मौतः एक घायल; ट्रेन के 5 डिब्बे-इंजन पटरी से उतरे भिंड में रेत माफियाओं पर कार्रवाई के समय रेत माफियाओं ने एसडीएम की गाड़ी को मारी टक्कर बाल-बाल बचे। अधिकारियों की प्रताड़ना से तंग आकर पोस्ट मेन ने फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला की समाप्त ग्वालियर पुलिस लाइन के क्वार्टर में प्रधान आरक्षक ने की आत्महत्या, मचा हड़कंप
मध्यप्रदेश

मंदसौर गोलीकांड के छह वर्ष पूरे होने पर 6 जून को कांग्रेस करेगी किसान सम्मेलन

भोपाल। 6 जून 2023 को मंदसौर गोलीकांड के छह वर्ष पूरे होने पर प्रदेश कांग्रेस पिपलियामंडी में किसान सम्मेलन करेगी। इसमें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमल नाथ सहित पार्टी के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी हिस्सा लेंगे।

शिवराज सरकार ने इसकी जांच के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश जेके जैन की अध्यक्षता में आयोग गठित किया था। इसने 13 जून 2018 को प्रतिवेदन सरकार को सौंपा था, लेकिन यह विधानसभा में प्रस्तुत नहीं हुआ है। कांग्रेस ने जैन आयोग सहित अन्य जांच आयोगों की रिपोर्ट सरकार बनने पर विधानसभा में प्रस्तुत करने का विषय वचन पत्र में शामिल किया है।

प्रदेश कांग्रेस की आरोप पत्र समिति के उपाध्यक्ष पारस सकलेचा का कहना है कि भाजपा सरकार किसान हितैषी होने का दावा करती है लेकिन गोलियां भी इसी शासनकाल में चली। आज तक जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया। दोषी अधिकारियों को बचाने के लिए लगातार प्रयास किए गए। किसानों को परेशान करने के लिए झूठे प्रकरण बनाए।

वहीं, भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता यशपाल सिंह सिसौदिया ने कहा कि जब कांग्रेस की सरकार थी, तब सुध नहीं ली और अब जब चुनाव का समय पास आ गया है तो दिवंगत किसान याद आ रहे हैं। 2017 में मंदसौर जिले के पिपलिया मंडी में कांग्रेस के नेताओं ने किसानों को भड़काया था, जिसके कारण यह स्थिति बनी कि आत्मरक्षा के लिए पुलिस को हिंसक भीड़ पर गोलियां चलानी पड़ी थीं, जिसमें पांच आंदोलनकारियों की मृत्यु हो गई थी।

वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने इस मुद्दे को भुनाया। जब सरकार बनी तो पीड़ित परिवारों की कोई सुध ली और न ही दिवंगत किसानों का स्मारक बनवाए। अब फिर से विधानसभा चुनाव पास हैं, तो कांग्रेस को किसानों की याद आने लगी है।

Related Articles

Back to top button