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मध्यप्रदेश

राष्ट्रीय सम्मेलन में शामिल आजीविका मिशन की महिलाएं मुख्यमंत्री योगी बोले यानी आप अपने आप में बैंक हो गई

राजगढ़। ग्राम पंचायत स्तर पर डिजिटल लेनदेन के प्रोत्साहन हेतु बीसी सखी राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन उत्तर प्रदेश के लखनऊ में किया जा रहा है। इस सम्मेलन में भाग लेने के लिए ग्रामीण आजीविका मिशन जिला राजगढ़ विकासखंड नरसिंहगढ़ के ग्राम लसूड़िया पाका की लक्ष्मी प्रजापति और मीना यादव इस सम्मेलन में शामिल हुई। बैंक सखियों के कामों को देखते हुए उप्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यानी की आप तो अपने आप में बैंक हो गई हो।

उल्लेखनीय है कि 24 से 26 मई तक लखनऊ में राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया था, जिसमें राजगढ़ जिले में जिले में आजीविका मिशन के माध्यम से बड़े स्तर पर स्वसहायता समूहों का संचलान को देखते हुए बैंक सखियों के बेहतर कामकाज को देखते हुए जिले से भी बैंक सखियों को आमंत्रि‍त किया था। जिसमें दो महिलाएं बैंक सखियों के रूप में पहुंची थी व सात समूह की अन्य महिलाएं पहुंची थी।

कार्यशाला में महिलाओं ने वहां माडल के रूप में बताया कि बीसी सखी के माध्यम पर ग्रामीण स्तर पर डिजिटल लेनदेन के साथ-साथ खाता खोलने पैसा जमा करने और निकालने की सुविधा बीसी सखी के माध्यम से समूह की महिलाओं को दी जाती है, समूह की महिलाओं के बीच में रहकर समूह की एक दीदी बीसी सखी का कार्य करती है, जिससे समूह की महिलाओं का समय की बचत के साथ-साथ आर्थिक बचत में मदद मिलती है। इस पूरे कांसेप्ट की शुरुआत राजगढ़ जिले से हुई थी। इस मौके पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री गिरिराज सिंह ने ग्राम पंचायत बीसी सखी द्वारा दी जा रही सेवाओं की सराहना की और इस कांसेप्ट को बहुत बेहतर बताया। सीएम योगी को यहां के बैंक सखी माडल के बारे में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग उप्र के डायरेक्टर द्वारा बारकी से जानकारी दी। बैंक सखियों के कामों को बताया। यह देखने के बाद योगी ने जिले की महिलाओं से कहाकि यानि की आप तो अपने आप में बैंक हो गई हो।

गांव-गांव में है 80 बैंक सखियां, गांव में ही कर लेती है राशि का लेनदेन

आजीविका मिशन के तहत समूह से जुडकर जिले में 80 बैंक सखियां काम कर रही है। उनके द्वारा बैंक जाने व महिलाओं व ग्रामीणों को बैंक जाने की दिक्कत बहुत हद तक दूर कर रखी है। चह कम्प्यूटराइज तरीके से गांवों में ही राशि जमा करने व निकालने का कार्य कर देती है। जिससे एक तो ग्रामीणों को बैंकों के चककर नहीं लगाने होते हैं व दूसरा बैंक सखियों को भी बैंकों से कमिशन के रूप में राशि प्राप्त होती है। 10 हजार से अधिक प्रति बैंक सखी की आय होती है। इसके अलावा जिले में 14 हजार से अधिक समूह हैं व 1 लाख 60 हजार से अधिक महिलाएं इन समूहों से जुडी हुई है।

इनका कहना है

बैंक सखियां सहित 9 सदस्यों की टीम लखनऊ पहुंची थी, जहां उप्र के मुख्यमंत्रीजी ने भीउनकी सराहना की है। राष्ट्रीय स्तर पर राजगढ़ जिले के बैंक सखी माडल को पेश किया गया है।

संदीप सोनी, प्रबंधक आजीविका मिशन राजगढ

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