ब्रेकिंग
मुरैना में 'जहर' पर मेहरबानी: क्या मिलावटखोरों के 'कवच' बन गए हैं अधिकारी गुप्ता? मुरैना पुलिस की 'सेलेक्टिव होली': सच दिखाने वालों से दूरी, वाह-वाही करने वालों पर 'रंग' की बौछार! यूजीसी और आरक्षण को लेकर अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की दो दिवसीय राष्ट्रीय बैठक इंदौर में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी घोषित मंडला पुलिस की त्वरित कार्रवाई डकैती के पांच आरोपी जबलपुर से गिरफ्तार, रकम एवं उपयोग की गई कार बरामद भिंड के गोहद चौराहा थाना क्षेत्र के बिरखडी गांव के पास तेज़ रफ़्तार ट्रक ने ट्रेक्टर ट्रॉली में मारी... असम में राजधानी एक्सप्रेस से टकराकर 7 हाथियों की मौतः एक घायल; ट्रेन के 5 डिब्बे-इंजन पटरी से उतरे भिंड में रेत माफियाओं पर कार्रवाई के समय रेत माफियाओं ने एसडीएम की गाड़ी को मारी टक्कर बाल-बाल बचे। अधिकारियों की प्रताड़ना से तंग आकर पोस्ट मेन ने फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला की समाप्त ग्वालियर पुलिस लाइन के क्वार्टर में प्रधान आरक्षक ने की आत्महत्या, मचा हड़कंप
देश

 समलैंगिक शादी को मान्यता देने की याचिकाओं पर 18 अप्रैल से सुनवाई शुरू होगी

नई दिल्ली । समलैंगिक शादी को मान्यता देने की याचिकाओं पर 18 अप्रैल से सुनवाई शुरू होगी। समलैंगिक शादी को मान्यता देने की याचिकाओं पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट में पांच जजों के संविधान पीठ का गठन किया गया है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया  डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस संजय किशन कौल, जस्टिस एस रवींद्र भट, जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की बेंच इस मामले पर सुनवाई करेगी। 18 अप्रैल से सुनवाई शुरू होनी है। सुनवाई की लाइव स्ट्रीमिंग भी होगी।
आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल कर सेम सेक्स मैरिज (समलैंगिक शादी) को मान्यता देने की मांग की गई है। वहीं केंद्र सरकार ने इसका विरोध किया है। समलैंगिक विवाह को मान्यता देने की मांग वाली याचिकाओं के विरोध में सुप्रीम कोर्ट में एक और अर्जी दाखिल की गई है। जमीयत उलेमा ए हिन्द के बाद एक और मुस्लिम निकाय ने समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने का विरोध किया है।
तेलंगाना मरकज़ी शिया उलेमा काउंसिल ने समलैंगिक विवाह का विरोध किया है। अपनी अर्जी में इसने कहा है कि समलैंगिक विवाह की अवधारणा पश्चिमी भोगवादी संस्कृति का हिस्सा है। भारत के सामाजिक ताने-बाने के लिए यह विचार अनुपयुक्त है। समान-सेक्स के बीच विवाह को वैध बनाने का विचार विशेष रूप से पश्चिमी अवधारणा है, क्योंकि पश्चिमी देशों में, धर्म काफी हद तक कानून का स्रोत नहीं रह गया है। अर्जी में कहा गया है कि विवाह का प्रश्न धर्म और व्यक्तिगत कानून से जुड़ा हुआ है, इसलिए समलैंगिक विवाह को मान्यता देने की मांग वाली याचिकाएं खारिज की जाएं।

Related Articles

Back to top button