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मध्यप्रदेश

विक्रमादित्य ने बहन सुंदरा के लिए बनवाई थी महाकाल मंदिर की प्रतिकृति, नाम पड़ा सुंदरसी महाकाल

शाजापुर ।    शाजापुर जिले के संदरसी कस्बे में विश्व प्रसिद्ध ज्योर्तिलिंग भगवान महाकालेश्वर मंदिर की प्रतिकृति स्थित है। सुंदरसी का यह महाकाल मंदिर अवंतिका नगरी उज्जैन से महज 77 किमी दूर है। सुंदररी के बुजुर्ग बताते हैं कि इस कस्बे का ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व है। यहां महाकाल मंदिर की प्रतिकृति मौजूद हैं। इस मंदिर का निर्माण सम्राट विक्रमादित्य ने अपनी बहन सुंदरा के लिए करवाया था। सुंदरा उज्जैन में महाकाल, गोपाल मंदिर आदि के दर्शन के बाद ही भोजन करती थी। सुंदरा के विवाह के बाद भगवान के नियमित दर्शन के लिए भाई विक्रमादित्य ने न सिर्फ महाकाल मंदिर बल्कि हरसिद्धी और गणेश मंदिर भी बनवाए थे।

मंदिर के विकास के लिए सीएम शिवराज ने की घोषणा

मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने इस मंदिर के विकास के लिए राशी दिए जाने की बात शुजालपुर में आयोजित लाड़ली बहना सम्मेलन में कही है। जिससे मंदिर के कायाकल्प की उम्मीद जगी है।तत्कालीन कलेक्टर दिनेश जैन भी इस मंदिर के विकास को लेकर काफी प्रयासरत थे। साथ ही स्थानीय जनप्रतिनिधि व मंदिर से जुड़े लोग काफी समय से स्कूल शिक्षामंत्री इंदरसिंह परमार से इस मंदिर के विकास कार्य की मांग कर रहे थे।

अगर इस मंदिर का सही ढंग से विकास होता है तो बाबा महाकाल के दर्शन के लिए उज्जैन आने वाले महाकाल मंदिर की ही प्रतिकृति वाले इस मंदिर में दर्शन पूजन के लिए जरूर आएंगे। बस जरूरत है तो मंदिर के विकास और उज्जैन में इसकी महत्ता के प्रचार-प्रसार की।

श्रावण में होती है भस्मआरती

सुंदरसी के इस प्राचीन महाकाल मंदिर में उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर की तर्ज पर नियमित भस्मारती भी होती थी। हालांकि वर्तमान में सिर्फ श्रावण माह में ही भस्मारती होती है। मंदिर के ठीक पीछे पानी का कुंड भी बना है। प्रशासन इस पूरे क्षेत्र के कायाकल्प की तैयारियों में जुटा है।तत्कालीन कलेक्टर दिनेश जैन ने मंदिर के कायाकल्प के लिए पर्यटन विभाग को प्रस्ताव भी भेजा था।

कई पुस्तकों में है उल्लेख

सुंदरसी के इस महाकाल मंदिर का पुरातत्व विभाग की कई पुस्तकों में भी इस मंदिर का उल्लेख है।जानकारों के अनुसार 13वीं शताब्दी में इसका निर्माण हुआ। यहां मंदिर के पास एक पेड़ के नीचे तीर्थंकर की मूर्तियां भी हैं। उज्जैन पुरातत्व विभाग के स्व. विष्णुदत्त श्रीधर वाकणकर यहां शोध करने करीब 25 वर्ष पहले पहुंचे थे। वह यहां से कई प्राचीन मूर्तियां भी ले गए थे। शाजापुर निवासी लोक संस्कृतिविद् डा. जगदीश भावसार बताते हैं कि सुंदरसी का मंदिर हूबहू उज्जैन महाकाल मंदिर की तरह है। इस मंदिर को उल्लेख कई लेखकों ने किया है।यहां का विकास करने से जिले में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने सुंदरसी के महाकाल मंदिर के विकास के लिए राशी देने की बात कही है। स्कूल शिक्षामंत्री इंदरसिंह परमार व क्षेत्र के जनप्रतिनिधि भी यहां के विकास के लिए प्रयासरत हैं। मेरी प्राथमिकता भी जिले में पर्यटन को बढ़ावा देने की है। शासन स्तर से राशी प्राप्त होने के बाद मंदिर के विकास और विस्तार का कार्य किया जाएगा। जिला स्तर पर भी जो संभव होगा, इस मंदिर के विकास के लिए हम करेंगे।

– किशोर कन्याल, कलेक्टर

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