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मुरैना। दो साल के मासूम के गले में फंसा मटर का दाना 20 मिनट के रास्ते को 2 घंटे में लाया एंबुलेंस चालक लापरवाही से गई मासूम की जान।

मुरैना में दो साल के मासूम की मटर के दाने खाने के बाद मौत हो गई। परिवार का कहना है कि दाने बच्चे की सांस नली में अटक गए थे। उसका दम घुटने लगा। उल्टियां भी हुईं। बानमोर से मुरैना लाते-लाते बच्चे ने दम तोड़ दिया। माता-पिता का आरोप है कि जिस एंबुलेंस से बच्चे को मुरैना ला रहे थे, उसके ड्राइवर ने रास्ते में बच्चे को ऑक्सीजन भी नहीं लगाया। गाड़ी भी धीरे-धीरे चलाकर लाया। घटना शुक्रवार की है। बानमोर निवासी राजवीर जाटव का दो साल का बेटा रिव्यांश मटर के कुछ दाने मुंह में डालकर चबाने की कोशिश कर रहा था। दाने उसके गले में फंस गए, इसके बाद उसकी हालत बिगड़ गई। वह उल्टियां करने लगा। बच्चे की यह हालत देखकर माता-पिता घबरा गए। वे उसे बानमोर के एक प्राइवेट हॉस्पिटल लेकर गए, लेकिन डॉक्टर ने हाथ खड़े कर दिए। डॉक्टर ने उसे मुरैना जिला अस्पताल ले जाने की सलाह दी। डॉक्टर ने एंबुलेंस भी मंगवा दी। एंबुलेंस में बैठकर पति-पत्नी मुरैना जिला अस्पताल के लिए रवाना हुए। इसी एंबुलेंस से बच्चे को अस्पताल लाया गया था। इसी एंबुलेंस से बच्चे को अस्पताल लाया गया था। 20 मिनट का रास्ता पौन घंटे में तय किया बच्चे के माता-पिता ने बताया, बानमोर से मुरैना शहर का रास्ता 20 से 25 मिनट का है, लेकिन एंबुलेंस ड्राइवर ने पौन घंटे से ऊपर समय लगा दिया। जब एंबुलेंस धीमे चल रही थी और बच्चे की सांस उखड़ रही थी, तो उन्होंने एंबुलेंस ड्राइवर से जल्दी चलने को भी कहा। ड्राइवर ने कहा कि वह इससे ज्यादा तेज नहीं चला सकेगा।

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